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चौपाल: कैसा गढ़, आतंक के विरुद्ध

कांग्रेस 2012 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली की पांच में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी।

rahul gandhi, pm modi, akhilesh yadav, chief minister, press conferenceराहुल गांधी और राहुल गांधी की संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस।

कैसा गढ़

कांग्रेस 2012 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली की पांच में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। उसकी दुर्गति का हाल देखिए कि इनमें से तीन क्षेत्रों में तो वह तीसरे नंबर पर पहुंच गई। अमेठी की पांच में से केवल दो सीटों- तिलोई और जगदीशपुर- में ही वह विजय हासिल कर सकी। इन दो में से भी उसका एक विधायक पार्टी छोड़ गया। अमेठी सदर सीट से भी कांग्रेस के कद्दावर नेता, सांसद और पूर्व राजा संजय सिंह की पत्नी अमिता को हार का मुंह देखना पड़ा। और यह सब तब हुआ जबकि प्रियंका गांधी अपने पति रॉबर्ट वाडरा और दोनों बच्चों को सत्रह दिन तक चुनाव सभाओं के मंचों पर लेकर घूमती रहीं, वोट के लिए मिन्नतें करती रहीं। यही नहीं, सोनिया और राहुल गांधी ने भी पृथक-पृथक रायबरेली-अमेठी के दसों विधानसभा क्षेत्रों में सभाएं कीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी बड़ी मुश्किल से अमेठी जीत सके थे। क्षेत्र के लिए एकदम नई स्मृति ईरानी ने उन्हें पसीने छुड़ा दिए। उनका जीत का अंतर तीन लाख घट कर एक लाख पर आ गया। इन सब तथ्यों के बावजूद प्रियंका गांधी जब यह कह कर अखिलेश यादव से दसों सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ने का आग्रह करती हैं कि यह उनकी पार्टी का गढ़ है, तो सुन कर हंसी आती है।
’अजय मित्तल, मेरठ

आतंक के विरुद्ध

दुनिया के अब तक के सबसे कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस के खूनी खेल, अनाचार, नृशंसता, बर्बरता आदि का विवरण हर टीवी चैनल आए दिन दिखाता है। बंधकों का बेरहमी से सर कलम करना, लोहे के पिंजरे में जिंदा जलाना, गोलियों से मासूमों को भून देना आदि-आदि। देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, दिल दहल जाता है। इस आतंकी संगठन के पास आधुनिकतम हथियार, संचार के नवीनतम संसाधन/ उपकरण आदि सब कुछ हैं। सवाल है कि इस संगठन को ये सब अकूत सामरिक संसाधन कौन सप्लाई करता है? कौन से ऐसे देश हैं जो इस संगठन की मदद करते हैं? इस तथ्य का उद्घाटन कोई भी चैनल नहीं करता है, बस ‘क्लिपें’ दिखाता है और सूचनाओं का चित्रात्मक वर्णन करता है।
जब तक आईएसआईएस को हथियारों की सप्लाई बंद नहीं होती, दुनिया में आतंक बंद नहीं होगा। लाख उपाय करते रहें, विश्व में जब तक गुप्त रूप से हथियारों, गोला-बारूद आदि की खरीद-फरोख्त पर अंकुश नहीं लगता, तब तक आतंकवाद बना रहेगा।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

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