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चौपाल: सहमति का पर्यावरण

भारत ने गांधी जयंती के दिन पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर अपना अनुमोदन संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया।

Author Published on: October 5, 2016 4:45 AM
climateप्रतीकात्मक तस्वीर

भारत ने गांधी जयंती के दिन पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर अपना अनुमोदन संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया। गौरतलब है कि तमाम उठा-पटक के बाद पिछले साल दिसंबर में जलवायु परिवर्तन की गंभीरता पर दुनिया भर के तमाम देश फ्रांस की राजधानी पेरिस में तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार एकत्रित हुए थे। आखिरकार लंबे विचार-विमर्श के बाद 185 देशों ने ग्रीन-हाउस गैसों में कमी के लाने के मकसद से पेरिस समझौते को अपनी सहमति देकर सफल बनाया। मगर भारत ने अपनी कुछ जरूरतों और मजबूरियों का जिक्र करते हुए पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कहना था कि भारत एक विकासशील देश है, विकसित देशों की तुलना में अभी हमने बहुत कम औद्योगीकरण किया है। ऐसे में हमारे लिए पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर पाना संभव नहीं है। जावड़ेकर का यह भी तर्क था कि भारत आज एक बड़ी युवा आबादी वाला देश है, इस युवा आबादी को रोजगार देने की सख्त आवश्यकता है जोकि बिना तेज औद्योगीकरण के संभव नहीं हो पाएगा।

वर्तमान में चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन-उत्सर्जक देश है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र भी इस बात को समझ रहा था कि अगर भारत जैसा महत्त्वपूर्ण कार्बन-उत्सर्जक देश पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा तो समझौता तमाम कोशिशों के बाद भी नाकाम ही साबित होगा। इसी का नतीजा था कि भारत पर अमेरिका, फ्रांस सहित तमाम बड़े देशों का दबाव बनना शुरू हो गया था और व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतराष्ट्रीय छवि के लिए भी यह प्रतिकूल था। हालात की गंभीरता को समझते हुए भारतीय आलाकमान ने इसी साल बाईस अप्रैल को न्यूयार्क में पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए थे जबकि अनुमोदन के लिए महात्मा गांधी की जयंती (दो अक्तूबर) का दिन चुना गया था। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि पेरिस समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक पचपन देशों की सहमति जल्द से जल्द मिल जाएगी। इसके साथ ही भारत इस बात की भी उम्मीद करेगा कि समझौते की शर्तों के अनुसार विकसित देश भारत को विकास गति जारी रखने के लिए ऐसी तकनीकें और उपकरण मुहैया कराएंगे जो पर्यावरण के अनुकूल हों।
’नितीश कुमार, आईआईएमसी, दिल्ली

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