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चौपाल: आस निराश, संवेदना की मौत

सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन जनता कि सके हक में फैसला करेगी इसका निर्णय ग्यारह मार्च को ही हो पाएगा।

Author March 1, 2017 7:18 AM
UP Chunav 2017: चुनावों के दौरान एक दूसरे पर विरोध में बिगड़े राजनीतिज्ञों के बोल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आस-निराश

उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में पांच चरण पूरे हो चुकेहैं और के वल दो चरण शेष हैं। सभी दल अपनी-अपनीजीत क ा दावा क र रहे हैं लेकि न जनता कि सके हक में फै सला क रेगी इसक ा निर्णय ग्यारह मार्च क ो ही हो पाएगा।अगर उत्तर प्रदेश के चुनाव में भाजपा क ी बात क रें तोपांच चरणों के मतदान के बाद वह हताश नजर आ रहीहै। इसीलिए सत्ताईस फ रवरी क ो प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी नेएक चुनावी रैली में त्रिशंकु विधानसभा क ी आशंक ाजताते हुए जनता से पूर्ण बहुमत क ी मांग क ी। दूसरी ओरभाजपा के वरिष्ठ नेता और के ंद्रीय मंत्रियों ने मुसलमानोंक ो टिक ट न दिए जाने पर चिंता व्यक्त क ी है।सबसे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री औरके ंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने क हा कि पार्टी क ोमुसलिम प्रत्याशी उतारने चाहिए थे। उसके बाद राजनाथके सुर में सुर मिलाते हुए उमा भारती और मुख्तारअब्बास नक वी ने भी इसे दोहराया। उत्तर प्रदेश मेंभाजपा अपना वनवास खत्म क रना चाहती है। उसक ीप्रतिष्ठा इसलिए भी दांव पर कि सूबे के 80 सांसदों मेंसे 73 सांसद उसी के हैं। खुद प्रधानमंत्री मोदी भी यूपीसे सांसद हैं। जीत क ी आस लगाए बैठी भाजपा कवरिष्ठ नेताओं और प्रधानमंत्री के बयानों से लगता हैपार्टी के लिए सब कु छ सही नहीं चल रहा है।
सूरज कुमार बैरवा, राजस्थान विश्वविद्यालय

संवेदना की मौत

आगरा के अर्जुन नगर तिराहे (शाहगंज) के पासएक महिला लगभग चार माह से मां के शव के साथरह रही थी। शव कं क ाल बन गया था। बेटी क ी भीमौत हो गई। उसक ा शव सड़ा तो क्षेत्र में दुर्गंध फै ली सूचना पर 25 फ रवरी 2017 क ो पुलिस पहुंची। क मरेक ा नजारा देखक र पुलिस के होश उड़ गए। इतनीभयंक र दुर्गंध थी कि वहां खड़ा भी नहीं हुआ जा रहाथा। दो क मरों के कि राए के मक ान में वीना अग्रवालऔर उसक ी बुजुर्ग मां विमला रहती थी। विमला एसएनमेडिक ल क ॉलेज में स्टाफ नर्स के पद से रिटायर हुईथी। वीना पढ़ी-लिखी थी। मां के कं क ाल के साथ रहीवीना मनोरोगी नहीं थी। मां क ी मौत क ो वह अके लेपनके क ारण स्वीक ार नहीं क र रही थी। उसके मन में यहभय था कि मां क ी मौत क ी जानक ारी लोगों क ो होगई तो वह समाज क ी नजरों में अके ली हो जाएगी।क ोई उसक ी मदद क ो नहीं आएगा।पड़ोसियों क ी संवेदनहीनता भी इस घटना में सामनेआती है। एक तरफ हम ग्लोबल विलेज क ी अवधारणाके साक ार होने क ी संभावना व्यक्त क रते हैं तो दूसरीओर हमारे आसपास ऐसी दर्दनाक घटनाएं हो रही हैं!हमने इंसान होक र क्या पाया और क्या खोया?

वीरेन्द्र सहवाग ने गुरमेहर कौर से जुड़े सवालों को किया नजरअंदाज

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