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चौपाल: आधार कार्ड के दुरुपयोग

आधार कार्ड के दुरुपयोग के भी उदाहरण सामने आ चुके हैं।

Author Published on: May 18, 2017 5:44 AM
jansatta chaupal editorial page aadhar unique identity pros and cons, aadhar card, plastic aadhar card, smart aadhar card, UIDAI, आधार कार्ड, पहचान पत्र, स्‍मार्ट कार्ड, प्‍लास्टिक आधार कार्ड, आधार कार्ड 60 रुपये, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणदेश में एक अरब लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं।

समझ से परे
केंद्र सरकार द्वारा अचानक आधार कार्ड को अनिवार्य किया जाना समझ से परे है। आधार कार्ड के दुरुपयोग के भी उदाहरण सामने आ चुके हैं। निजता के अधिकार के उल्लंघन के आरोप भी आधार कार्ड से जुड़ी एजेंसियों पर लगते रहते हैं। यदि आधार को अनिवार्य करना इतना आवश्यक है तो इससे संबंधित शंकाओं का समाधान किया जाना सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए। सर्वदलीय बैठक बुलाकर निष्कर्षों पर पहुंचा जाना चाहिए।
चरणबद्ध तरीके से आधार कार्ड को अनिवार्य किया जाए, जिससे आमजन को कष्ट का सामना न करना पड़े। आजकल कुछ स्थानों से आधार नोडल केंद्रों के काम नहीं करने की शिकायतें यदा-कदा आती रहती हैं। ऐसी समस्याओं को भी समय रहते दूर किया जाना आवश्यक है। आधार कार्ड की अनिवार्यता से पहले ढांचागत कमियों को दूर किया जाना आवश्यक है।
’अंकुर श्रीवास्तव, सूरतगढ़, राजस्थान
अंगदान को प्रोत्साहन
कई बार इंटरनेट पर और अखबारों में खबर पढ़ने को मिलती है कि एक व्यक्ति के अंगदान करने से न जाने कितने लोगों को नई जिंदगी मिल गई। भारत जैसे विश्व के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता न के बराबर है। तिस पर लोगों का अंधविश्वास इस समस्या को और बढ़ावा देता है। जीवित और ‘ब्रेन डेड’ व्यक्ति दोनों अंगदान कर सकते हैं। भारत में हजारों लोग प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। अगर उनके परिजनों की रजामंदी हो तो उनके अंग भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति को लगाए जा सकते हैं।
भारत में यह स्थिति चिंताजनक इसलिए है कि लोगों को पता ही नहीं कि अगर अंगदान करना है तो किस से संपर्क करें या कहां जाएं। एक वजह यह भी है कि कुछ चुनिंदा अस्पताल ही इसके लिए अधिकृत हैं। दूसरी समस्या है कि जिन अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण की सुविधा है, वे इसके लिए मरीजों से मोटी रकम वसूलते हैं। ऐसा कोई विरला उदाहरण मिलेगा जहां किसी गरीब मरीज को यह सुविधा मुफ्त में दी गई हो। इसके मद्देनजर जरूरी है कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय अभियान चला कर लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करें और सभी अस्पतालों को इससे जोड़ें। अंगदान के बारे में जो भ्रांतियां हैं उन्हें भी दूर करने की जरूरत है।
’शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलंगाना

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