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लोकतंत्र के विरुद्ध

एक के बाद एक तुगलकी फरमान! शायद यही भविष्य रह गया है हम भारतवासियों का; सबसे बड़े लोकतंत्र का।

Author January 3, 2017 12:51 AM
2000 के नए नोट। (Photo:PTI)

एक के बाद एक तुगलकी फरमान! शायद यही भविष्य रह गया है हम भारतवासियों का; सबसे बड़े लोकतंत्र का। पहले नोटबंदी और उसके पीछे के ‘नेक’ कारण, फिर नगदी-रहित भुगतान का उपदेश और अब पुराने नोट पाए जाने पर जुर्माने सहित जेल की सजा! लोकतंत्र का अर्थ ही है जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए शासन। ऐसा लगता है कि अण्णा हजारे द्वारा उठाए गए ‘राइट टु रिकॉल’ (जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने के अधिकार की मांग), जिसे हमारे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ एसवाई कुरैशी भी समर्थन देते रहे हैं, को अमल में लाने का वक्त आ गया है। कहीं हम ऐसे लोगों को तो चुन कर नहीं भेज रहे हैं जो लोकतांत्रिक तरीके से आकर बाद में लोकतंत्र को ही ‘हाईजैक’ कर लें?
’पुष्पेंद्र सिंह राजपूत, आगरा

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