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चौपाल: कैसी जेल

राजधानी दिल्ली की तिहाड़ जेल सबसे सुरक्षित मानी गई है और उसकी तर्ज पर विभिन्न राज्यों की जेल में भी कैदी विभिन्न तरह के अपराध करने के बाद बंद किए जाते हैं और जेलों को पूरी तरह चौकस और सुरक्षित बताया जाता है। लेकिन इन जेलों में भी सेंध लगने की बातें अक्सर सामने आती रही हैं।

कई बार जेलों के भीतर हथियारों के साथ हिंसा ने गंभीर हालात पैदा किए।

‘असुरक्षित जेल’ (2 अक्तूबर, संपादकीय) पढ़ा। जब भी कोई अपराध करता है तो कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के बाद पुलिस प्रशासन उसे जेल की सलाखों के पीछे बंद कर देता है। राजधानी दिल्ली की तिहाड़ जेल सबसे सुरक्षित मानी गई है और उसकी तर्ज पर विभिन्न राज्यों की जेल में भी कैदी विभिन्न तरह के अपराध करने के बाद बंद किए जाते हैं और जेलों को पूरी तरह चौकस और सुरक्षित बताया जाता है। लेकिन इन जेलों में भी सेंध लगने की बातें अक्सर सामने आती रही हैं।

ऐसे मामले भी पाए गए कि जेलों में किस प्रकार से स्मार्टफोन का उपयोग और नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है। वहां से रंगदारी वसूले जाने के मामले भी सामने आते हैं।

मगर खासतौर पर तिहाड़ जेल में ऐसे मामलों को देख कर कोई आश्चर्यचकित रह जाता है और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो जाते हैं। संगीन अपराधों में विभिन्न तरह के अपराधी भी जेलों में अगर इस तरह का धंधा चला कर बाहर के मामलों में पैसे वसूली का कार्य करते हैं तो इसे किस तरह की सुरक्षा के तौर पर देखा जाएगा।

जरूरत इस बात की है कि ऐसे कामों में लिप्त अपराधियों पर विशेष रूप से निगरानी रखी जाए और उनके खिलाफ विशेष रूप से कार्रवाई की जाए।
’विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली

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