ताज़ा खबर
 

विज्ञान का पाठ

किसी भी सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह विद्यार्थियों सहित आम लोगों के बीच विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करे।

scienceसांकेतिक फोटो।

किसी भी सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह विद्यार्थियों सहित आम लोगों के बीच विज्ञान में रुचि बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करे। भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है। लेकिन अगर सरकारें विज्ञान की पढ़ाई को देश में दुरुस्त करने के लिए गंभीरता दिखाए तो हमारा देश विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के सभी देशों को पीछे छोड़ दे सकता है। भारत में विज्ञान के अनमोल हीरे हैं, लेकिन उनके प्रति सरकार का ढुलमुल रवैया छिपा नहीं है। बहुत से भारतीय मूल के जो वैज्ञानिक दूसरे देशों में जाकर अद्भुत कारनामे कर रहे हैं, वे क्या अपने देश के लिए कुछ नहीं कर सकते थे?

अगर भारत में सरकार विज्ञान की पढ़ाई और वैज्ञानिक चेतना के प्रसार को लेकर गंभीरता दिखाए तो भारत हर तकनीक और विज्ञान के अन्य क्षेत्र में विश्व में अपनी धमक दर्ज कर सकता है। भारत में बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा आर्थिक तंगी कारण विज्ञान की पढ़ाई नहीं कर पाते और सरकारी शिक्षा संस्थाओं की विज्ञान की प्रयोगशालाएं और इससे जुडी अन्य तकनीकें आधुनिकता को तरसती रहती हैं।

यह सही है कि गैर-चिकित्सा क्षेत्र के कुछ युवा विज्ञान की पढ़ाई करने में रुचि नहीं दिखाते हैं, क्योंकि उन्हें यह उम्मीद नहीं होती कि विज्ञान की पढ़ाई करने के बाद उन्हें आगे बढ़ने या फिर विज्ञान के क्षेत्र में कुछ नया कर दिखाने का मौका मिलेगा ही। सरकार को चाहिए कि वह विज्ञान की पढ़ाई की तरफ गंभीरता दिखाए और विज्ञान के क्षेत्र में जो विद्यार्थी कुछ कर दिखाना चाहते हैं, उनकी हर संभव मदद करे, ताकि विज्ञान की पढ़ाई करने वालों की संख्या बढ़े और उन्हें विदेशों का रुख न करना पड़े।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर, पंजाब

वन्यजीवों के हित में

पिछले कुछ वर्षों में जंगली पशुओं के शहर में घुसने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। उन्हें देखते ही भगाने के लिए लोग इन पर टूट पड़ते हैं। कई बार ऐसे पशु मारे भी जाते हैं। आखिर जंगल के इन जीवों का शहर की ओर पलायन क्यों हो रहा है, हमें इस पर सोचना चाहिए। अधिकतर शहर जंगलों के और नदियों के किनारे बसे हुए हैं। जैसे-जैसे शहरों की आबादी बढ़ती गई, वैसे-वैसे जंगलों का सफाया भी तीव्र गति से होने लगा।

अवैध रूप से जंगलों की कटाई कर वहां की जमीन पर अतिक्रमण कर मनुष्य ने जंगली पशुओं के रहवासी क्षेत्र को कम करना शुरू कर दिया, जिससे पशुओं के सामने खाने के लाले पड़ने लगे। इसके बाद मजबूरन जंगलों के ये जीव भोजन की तलाश में शहरों का रुख करने लगे। ग्रामीण क्षेत्रों में इनके द्वारा कभी किसानों की बकरी या गाय पर हमला किया जाता है तो कभी इंसानों पर भी।

इसके बाद भय और सुरक्षा के मकसद से लोग धारदार हथियारों के साथ इन जंगली जानवरों पर हमला कर देते हैं, जिनमें इनकी जान भी चली जाती है। इनमें ज्यादातर तेंदुए, लकड़बग्घे जैसे हिंसक पशु शामिल रहते हैं। कई बार भूले-भटके जंगली हाथी भी शहर में घुस आते है, जो भारी नुकसान करते हैं। कभी-कभी वन विभाग को सूचित करने पर वनकर्मी पिंजरे लगा कर उन पशुओं को पकड़ कर फिर से जंगलों में छोड़ आते हैं।

लेकिन सवाल है कि अगर पशुओं को जंगल में भोजन ही नहीं मिलेगा और उनके विचरण करने के इलाके छोटे पड़ेंगे तो आखिर वे कहां जाएंगे और कब तक भूखे जंगलों में सिमटे रहेंगे! क्या यह जरूरी नहीं है कि सरकार अभयारण्यों के विकास पर समय रहते ध्यान दे, ताकि इंसानों के साथ-साथ जानवरों की जिंदगी का भी खयाल रखा जा सके?
’स्वप्निल शर्मा, मनावर, धार, मप्र

Next Stories
1 युवा की आवाज
2 नशे की सेंध
3 सम्मान अनमोल है
आज का राशिफल
X