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देश के लिए

भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए बहुत से देशभक्तों ने हंसते-हंसते अपनी जान तक कुर्बान कर दी।

indianसांकेतिक फोटो।

भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए बहुत से देशभक्तों ने हंसते-हंसते अपनी जान तक कुर्बान कर दी। देशभक्तों की बदौलत ही आज हम सब आजाद देश में पूरी आजादी से अपना अपना जीवनयापन कर रहे। उस दौर में बहुत से नौजवान देशभक्तों ने भी अपनी हंसने-खेलने की उम्र में ही देश को आजाद करवाने के लिए अंग्रेजों की ओर से ढाए गए न जाने कितने जुल्मो-सितम सहे थे। इन्हीं नौजवानों में थे शहीद-ए-आजम सरदार भगतसिंह, उनके साथी सुखदेव और राजगुरु। आज के ही दिन 23 मार्च, 1931 को इन तीनों क्रांतिकारियों ने देश के लिए बलिदान दे दिया था। अंग्रेजों ने इन तीनों को फांसी दे दी थी।

‘दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन की आएगी।’ शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके नौजवान साथियों के ये शब्द इस बात का अहसास दिलाते हैं कि उस समय नौजवानों के दिल में अपने देश को आजाद करवाने के लिए कितना जोश था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आज भारत के बहुत से लोग इनकी कुर्बानियों को भूल कर ऐसे काम भी कर रहे हैं, जो देशहित के लिए जरा भी उचित नहीं है।

देशभक्तों के जन्मदिन या शहीदी दिन पर सबको उनकी कुर्बानियों को याद करते हुए यह प्रण लेना चाहिए कि कभी कोई ऐसा काम नही करेंगे, जो देशहित और मनुष्यता के लिए उचित न हो। आज के युवाओं को नौजवान देशभक्तों से यह प्ररेणा लेनी चाहिए कि नफरत और सांप्रदायिकता आदि के जहर फैलाने के प्रयासों को कमजोर करना है और देशहित के कामों के लिए सदा तत्पर रहना है। नशे और फैशन को अपनी जिंदगी का मकसद नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के लिए हमेशा तत्पर रहना मकसद होना चाहिए। राजनेताओं और सताधारियों को भी महान देशभक्तों की कुर्बानियों को याद करते हुए मनुष्यविरोधी और आम लोगों को आपस में बांटने वाली देश विरोधी घटिया राजनीति से परहेज करना चाहिए और देशहित और जनहित बारे सोचना चाहिए।
’राजेश कुमार चौहान, जलंधर, पंजाब

एक विचार क्रांति

शहीद दिवस सिर्फ एक औपचारिकता या कर्मकांड नहीं है, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव है। तकनीकी ज्ञान से पूर्ण वर्तमान युवा पीढ़ी विचारों के स्तर पर पिछड़ रही है। युवा अपनी आंशिक खुशियां और मिथ्या अहंकार की वजह से कई बार अवसादग्रस्त होकर गलत मार्ग पर चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें सही मार्ग प्रदर्शित करने, जागरूक करने के लिए अमर शहीद भगत सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए।

आज अगर कोई नया शोध होता है या कोई नया अविष्कार सामने आता है तो हम सिर्फ उसे सामान्य ज्ञान की तरह याद करके आगे बढ़ जाते हैं। उस पर चिंतन करना तो जैसे भूल ही चुके हैं, जिससे हमारे सभी पहलुओं पर सोचने की क्षमता भी कम होती जा रही है। वर्तमान परिदृश्य में चेतनास्रोत की विचार क्रांति ही युवाओं को मार्गदर्शित करने में सहयोगी सिद्ध हो सकती है। यही कारण भी था कि भगतसिंह हमेशा से विचारों को परिपक्व और बहुआयामी बनाने पर बल देते थे। असामाजिकता के भंवर से घिरते युवा को पथ प्रदर्शित कर देश सेवा, समाज सेवा से जोड़ने के लिए यह विचार क्रांति ओर अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
’मोहित पाटीदार, धामनोद, मप्र

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