ताज़ा खबर
 

प्रदूषण के ठिकाने

हाल ही में स्विस संगठन आइक्यूआर द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित तीस शहरों में से बाईस भारत के शहर है।

pollutionप्रदूषण बढ़ने से लोगों को हो रही परेशानी। फाइल फोटो।

हाल ही में स्विस संगठन आइक्यूआर द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित तीस शहरों में से बाईस भारत के शहर है। यह हमारे लिए शर्म की बात है आंकड़ों को गौर से देखें तो पता चलता है कि शीर्ष दस में पहला स्थान चीन के शिनजियांग प्रांत को छोड़ कर बाकी नौ शहर भारत के हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद दूसरा स्थान रखता है। पिछली बार जारी आंकड़े में दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित राजधानी बताया गया था। आखिरकार हमारे शहर ही प्रदूषण के मामले में शीर्ष पर क्यों आते हैं? इसका मुख्य कारण है कि तेजी से बढ़ता अनियमित शहरीकरण, जिसका कोई पैमाना नहीं है।

इस संदर्भ में 2004 की विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ज्यादातर शहरीकरण बहुत ही गुपचुप ढंग से और बेतरतीबी के साथ हो रहा है। हम विकसित देशों की तर्ज पर शहरीकरण की राह पर अग्रसर है, लेकिन हम उनके पर्यावरण नियोजन पर ध्यान नहीं देते हैं। ध्यान से देखें तो पाएंगे कि दक्षिण भारत की अपेक्षा उत्तर भारत के शहर प्रदूषण के मामले में ज्यादा खराब स्थिति में हैं। दरअसल, मैदानी क्षेत्र होने के कारण उत्तर भारत में जनसंख्या का घनत्व और आबादी ज्यादा है और ज्यादा आबादी अनियोजित तरीके से पर्यावरणीय समन्वय न बनाने के कारण प्रदूषण में पूरक की भूमिका निभाने लगती है।

प्रदूषण एक ऐसी समस्या बन गया है कि हम उससे बच नहीं सकते। इसके लिए सरकार से लेकर प्रत्येक नागरिक को आगे आना होगा। हमें भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से सीख लेनी चाहिए। प्रत्येक नागरिक को प्रदूषण कम करने के लिए आगे होना होगा। इसके लिए वृक्षारोपण कारगर उपाय हो सकता है। वरना वह दिन दूर नहीं, जब हमें पीने के पानी की तरह आॅक्सीजन को भी खरीदना पड़ेगा।
’नीरज कुमार, आजमगढ़, उप्र

नियम के नुक्ते

बेशक देश में खेलों को बढ़ावा देने पर ईमानदारी से काम हो रहा है। मगर क्रिकेट अब भी खेलों का सरताज बना हुआ है। हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम में क्रिकेट के नशे में डूबे भारतीय दर्शकों ने कोरोना नियमों की धज्जी उड़ा कर रख दी। जिस देश में क्रिकेट की दीवानगी सिर चढ़ कर बोलती हो, वहां बेतुके खेल नियमों की नुक्ताचीनी होनी लाजिमी है। मैदान में अम्पायरों द्वारा दुविधा की स्थिति में आधुनिक तकनीक की मदद से लिए गए फैसले निश्चित रूप से उच्चस्तरीय न्यायिक मानदंड माने जाएंगे।

लेकिन क्रिकेट की विडंबना है कि तीसरी आंख की जांच से पहले मैदानी अम्पायर को अपना फैसला बताना होता है। ऐसे में फैसले विवादित होने पर खिलाड़ियों और दर्शकों की तीखी प्रतक्रिया हो तो हैरानी कैसी? घटना की बहुकोणीय और बारीक जांच के बावजूद निर्णय में असमंजस रहे तो त्वरित मैदानी इशारे को अंतिम निर्णय कैसे मान लिया जाए? बहरहाल, उपलब्ध तकनीक के बीच निर्णय ऊपर वाले पर छोड़ देना बेहतर विकल्प हो सकता है।
’एमके मिश्रा, रातू, रांची, झारखंड

पाकिस्तान का रुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत से बात करने की गुहार लगाई है। पाकिस्तान ने पहले ही सीमा पर संघर्ष विराम की घोषणा की है। उसकी नीति और नीयत में अचानक बदलाव क्यों आया? महत्त्वपूर्ण बात यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। विश्व पटल पर भारत की एक अच्छे नेता के रूप में पहचान बन चुकी है। हमारे देश को चीन से डरने की जरूरत नहीं है। दूसरी तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। वह चीन के हाथों की कठपुतली बन चुका है।

चीन उसका असली दोस्त नहीं है, मगर उसका हित ज्यादा पैसा कमाने में है। पाकिस्तान ने शर्त रखी है कि वातार्लाप में भारत पहल करे। क्या इस तरह के रुख के साथ संबंधों में सुधार संभव है? पाकिस्तान को अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करना चाहिए।
’नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंदर नगर, मंडी, हिप्र

Next Stories
1 जल का प्रबंधन
2 देश के लिए
3 नजर का सवाल
ये पढ़ा क्या?
X