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जल का प्रबंधन

सयुंक्त राष्ट्र संघ ने 2021 जल दिवस का नारा ‘पानी का महत्त्व’ रखा था। इसलिए हमें यह समझना होगा कि पानी का महत्त्व कितना अधिक है?

draughtसांकेतिक फोटो।

सयुंक्त राष्ट्र संघ ने 2021 जल दिवस का नारा ‘पानी का महत्त्व’ रखा था। इसलिए हमें यह समझना होगा कि पानी का महत्त्व कितना अधिक है? अफसोस यह है कि आने वाले वर्षों में विश्व के करीब एक सौ बीस देशों में पानी के लिए हाहाकार मचने वाली है। इसका एक प्रमुख कारण है हमारा प्रकृति के प्रति उदासीन होना। हमें यह समझना होगा कि जल का उचित प्रबंधन नहीं करने से कितनी दुर्लभ स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

भारत के संदर्भ में देखें तो हम यह पाएंगे कि भारत के भौगोलिक क्षेत्र के एक तिहाई हिस्से के सूखा ग्रस्त होने और बारह प्रतिशत क्षेत्र में बाढ़ आने की संभावना बनी रहती है। यह समस्या जल के उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण ही उत्पन्न होती है, जैसे- वाहन की धुलाई में अत्यधिक जल का दोहन, कछारी क्षेत्रो में भवन निर्माण कर नदी के विस्तार क्षेत्र में कटौती करना, जिससे नदियों में वर्षा के समय अत्यधिक पानी आता है और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। साथ ही मानसून के जाने के बाद नदियों में सूखा जैसी स्थिति बन जाती है। इसके चलते वर्तमान समय में वैसी नदियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो कभी सदानीरा हुआ करती थीं और वे वर्तमान में मानसूनी नदी बन गई है।

जल का दोहन मैदानी क्षेत्रों में अत्यधिक होता है। दरअसल, यहां जल की उपलब्धता सामान्य और संतोषजनक है, जिसके कारण ज्यादातर लोगों को इसके महत्त्व का एहसास नहीं हो पाता है। पर हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी पर उपलब्ध संसाधन सीमित हैं। हमें उनका सुनियोजित तरीके से उपयोग करना होगा, न कि दोहन। हमें जल संरक्षण पर भी विशेष बल देना होगा, जिसके लिए हमें तालाब, कुएं, झील एवं नदियों को विशेष संरक्षण देना होगा। सरकार और देश के सभी जिम्मेदार नागरिकों के परस्पर सहयोग से हम इस भयावह संकट से निपट सकते हैं।
’तेज प्रताप सिंह, प्रयागराज, उप्र

तंत्र में घुन

बिहार सरकार को मालूम है कि शराबबंदी को लेकर जब कार्रवाई करने की बात होती है तो क्या होता है। अगर राजा की गद्दी पर बैठ कर दोहरा मापदंड अपनाने पर आप तुरंत तो राहत की सांस ले सकते हैं, लेकिन उसका दूरगामी प्रभाव काफी प्रतिकूल होता है। राज्य के मुख्यमंत्री शराबबंदी के आलोचकों को सार्वजनिक कार्यक्रम में चाहे जितना सुना लें, लेकिन सच यही है कि अगर शराब बिक रहा है, शराब माफिया घूम रहे हैं तो इसके जिम्मेवार आम लोग नहीं, बल्कि सरकार में उच्च पदों पर बैठे अधिकारी और मंत्री हैं।

इसलिए अगर चार महीने तक अपने मंत्रिमंडल सहयोगी के संबंधियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सब यही कहेंगे कि अपनी गद्दी के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब कोई झमेला नहीं चाहते। शायद नीतीश कुमार से बेहतर इस सच को कोई नहीं जानता कि कार्रवाई अब तक नहीं हुई तो इसके पीछे क्या कारण हैं!
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

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