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अमेरिका की दादागीरी

ईरान के हार्मोज्दान प्रांत के मुबारक इलाके में अमेरिका अपने एक एमक्यू 4सी ट्राइटन ड्रोन विमान से जासूसी कर रहा था, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार भी किया है, को ईरानी सेना ने अपने रूस निर्मित दमदार रॉडार गाइडेड मिसाइल एस-300 से मार गिराया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।(Source: AP file Photo)

अमेरिका एक युद्धपिपासु देश है। इसका पिछले सत्तर सालों का इतिहास खंगालें तो यह दुनिया के किसी न किसी भूभाग में विशेषकर गरीब और छोटे देशों से अपने आर्थिक और वैचारिक स्वार्थ पूरे करने के लिए उन पर युद्ध थोप कर वहां के लोगों को मौत के घाट उतारता रहा है। कोरिया, जापान, वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान, सीरिया, लीबिया आदि देशों की व्यवस्था और उनकी सभ्यता नष्ट करने के साथ-साथ बड़ी संख्या में उन देशों के लोगों की हत्या भी कर चुका है। हाल में ईरान के हार्मोज्दान प्रांत के मुबारक इलाके में अमेरिका अपने एक एमक्यू 4सी ट्राइटन ड्रोन विमान से जासूसी कर रहा था, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार भी किया है, को ईरानी सेना ने अपने रूस निर्मित दमदार रॉडार गाइडेड मिसाइल एस-300 से मार गिराया।

ईरानी सेना ने भी इस विमान को एक जासूसी आरक्यू-4 ग्लोबल हॉक के रूप में चिन्हित कर दिया है। वस्तुत: ईरान ने इस अमेरिकी ड्रोन को गिरा कर अमेरिकी दंभ को चकनाचूर कर दिया है। अब प्रश्न है कि खुद अमेरिका अपने देश के किसी भूभाग पर किसी भी अन्य देश के जासूसी विमान से जासूसी करते हुए बर्दाश्त कर लेगा? निश्चित रूप से नहीं। तो ईरान की कार्रवाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ‘ईरान की बहुत बड़ी गलती’ कैसे करार दे सकते हैं? आज सभी को मालूम है कि पूरा विश्व परमाणु हथियार के ढेर पर बैठा है। इस स्थिति में तनाव की एक छोटी-सी चिनगारी भी इस संपूर्ण विश्व को मात्र कुछ मिनटों में तबाह कर सकती है! अमेरिका को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वह अजेय है या विश्वयुद्ध छिड़ने पर वह सुरक्षित रह पाएगा।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

बजट से उम्मीदें
साल 2018 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उत्तार-चढ़ाव वाला सफर था। उम्मीदें तो बहुत ज्यादा थीं। बड़े सुधारों की आशा थी। जहां छोटे-मोटे कुछ आर्थिक सुधार हुए, लेकिन कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। भारत आर्थिक तौर पर मजबूत लगा, मगर इसका श्रेय घरेलू कारणों के बजाय दुनिया में तेल के दामों में गिरावट को ज्यादा मिला। अब उम्मीदें आगामी बजट से हैं। भारत एक निम्न मध्य आय वाला देश है। इस वर्गीकरण के तहत प्रति व्यक्ति सालाना एक हजार डॉलर से कम आमदनी वाले देश निम्न आय वाले होंगे। हालांकि गरीबी को पूरी तरह से दूर करना संभव नहीं है, लेकिन इसका वितरण समुचित ढंग से हो तो गरीबी का मुकाबला किया जा सकता है। इसके लिए कम से कम दो दशकों तक काम करना होगा।

आगामी बजट से आम जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। जहां एक बड़ा वर्ग कर छूट की आस लगाए बैठा हैं, वहीं युवाओं को पूरा फोकस शिक्षा सहित उन्हें मिलने वाले रोजगार पर है। बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए इस बार कौनसा फार्मूला सरकार आम जनता के सामने पेश करेगी, यह देखने वाली बात है। बुजुर्गों को भी बजट से काफी उम्मीद है। पेंशनधारी हों या दूसरे बुजुर्ग, सभी की निगाहें बजट पर हैं। निवेशक भी अपने लिए बजट में कुछ खास तलाशेंगे। जो हो, बजट आम जनता, किसानों और रोजगार पैदा करने वाला होना चाहिए।
’मनीषा, कुशीनगर

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