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विविधता की रक्षा

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस बार का विषय था- सतत् जैव विविधता और पर्यटन।

Author May 23, 2017 05:26 am
पृथ्वी।

विविधता की रक्षा

पूरी दुनिया में बाईस मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस बार का विषय था- सतत् जैव विविधता और पर्यटन। हमारे जीवन में जैव विविधता का काफी महत्त्व है। हमें एक ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव विविधता में समृद्ध, टिकाऊ और आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर प्रदान कर सके। जैव विविधता सभी जीवों और पारिस्थितिकी तंत्रों की विभिन्नता एवं असमानता को कहा जाता है। धरती की जैव विविधता पर संकट के बादल लगातार गहराते जा रहे हैं। फुदकती गोरैया हो या फिर नाचता हुआ मोर, गंगा की डाल्फिन हो अथवा अफ्रीकन जिराफ, ये सब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।

हमारी पृथ्वी पर 2 लाख 40 हजार किस्म के पौधे तथा 10 लाख 50 हजार प्रजातियों के प्राणी हैं। उसमें 20 प्रतिशत जैव विविधता तो पांच फीसद भूभाग वाले द्वीपों पर पाई जाती है। दुनिया में 12 जैव विविधता के समृद्ध क्षेत्र हैं, जिसमें भारतीय भूभाग भी सम्मिलित है। भारत में दुनिया का केवल 2.4 प्रतिशत भू-भाग है, पर विश्व की आठ प्रतिशत जैव विविधता इसी भूभाग पर पाई जाती है। भारत में पेड़-पौधों की 47,000 और जीव-जंतु की 89,317 प्रजातियां पाई जाती हैं। 18,000 पुष्पीय पौधों में 5,725 पौधे केवल भारत में पाए जाते हैं, अन्यत्र दुनिया में कहीं नहीं। लेकिन जीव-जंतुओं के संरक्षण पर काम करने वाली संस्था आईयूसीएन की नई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में पाए जाने वाले जीवों में से एक तिहाई लुप्त होने के कगार पर हैं और यह खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है।
अगर इन्हें बचाने के त्वरित कदम नहीं उठाए गए तो ये सदा-सदा के लिए पृथ्वी से विलुप्त हो जाएंगे।लिहाजा, हमारे लिए जैव विविधता का संरक्षण बहुत जरूरी है। लाखों विशिष्ट जैविक और कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीवन उपस्थित है और हमारा जीवन प्रकृति का अनुपम उपहार है। इसलिए पेड़-पौधे, अनेक प्रकार के जीव-जंतु, मिट्टी, हवा, पानी, महासागर, पठार, समुद्र, नदियां आदि प्रकृति की इस समूची देन का हमें संरक्षण करना चाहिए। इसके लिए बहुस्तरीय तथा बहुआयामी कदम उठाने की जरूरत है। मसलन, प्रत्येक संकट ग्रस्त प्रजाति का उनके वास स्थान पर संरक्षण किया जाए। वन उत्पादों तथा वन्य जीवों की अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक ढांचे को चुस्त-दुरस्त बनाया जाए। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण तरीके इस्तेमाल हो। इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण को कम करने तथा जैव विविधता के महत्त्व के बारे में लोगों को व्यापक स्तर पर जागरूक किए जाने की जरूरत है।
’कैलाश बिश्नोई, मुखर्जी नगर, दिल्ली
कातिल भीड़
झारखंड में बच्चा चोरी के शक में भीड़ ने तीन युवकों को बेरहमी से मार डाला। महज शक के कारण भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेना क्या विधिसम्मत है? क्या भीड़ को किसी व्यक्ति को मार डालने का अधिकार है? इसका साफ मतलब है कि पुलिस-प्रशासन ने अपना काम जिम्मेदारी से नहीं किया और उस उन्मादी भीड़ को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। इससे पहले भी दादरी में गोमांस के संदेह में भीड़ ने कानून हाथ में लेकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी और उन हत्यारों पर कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि अब लोग बिना किसी भय के बेकसूरों को निशाना बना रहे हैं। ऐसी घटनाएं देश के माथे पर कलंक हैं और इस कलंक को धोने के लिए कानून हाथ में लेने वाले लोगों को चिह्नित कर उन्हें सजा दिलवानी होगी। अगर बेलगाम भीड़ को काबू नहीं किया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है।
’जफर अहमद, रामपुर डेहरू, मधेपुरा, बिहार

मोदी सरकार के 3 साल: 61 प्रतिशत लोगों का कहना- 'सरकार उम्मीदों पर खरी उतरी'

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