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चौपाल: सूचना के साथ

कुछ ऐसे लोग/संस्थाएं/पार्टियां/समूह हैं जो समाज में सोशल नेटवर्किंग यूट्यूब, फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर के द्वारा इतिहास को गलत बता कर लोगों को गुमराह करते हैं। इन सब मामलों में यूट्यूब सबसे आगे है

Author Updated: February 19, 2020 4:18 AM
RTIसूचना का अधिकार मिलने के बाद से पारदर्शिता भी बढ़ी है (फाइल फोटो)

भारत में सूचना का अधिकार लाना बहुत जरूरी था क्योंकि यहां लोगों के पास सूचनाएं ही नहीं होती थीं और यदि कुछ के पास होती भी थीं तो वे गलत। आज वैश्वीकरण के युग में जिस देश के पास जितनी ज्यादा सूचनाएं हैं वह उतना ही शक्तिशाली है चाहे किसी देश की रक्षा से संबंधित सूचना हो या वहां के नागरिकों की व्यक्तिगत सूचनाएं हों। कुछ देशों ने तो ‘टिक टाक’ नामक ऐप को प्रतिबंधित कर रखा है क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनके देश की जानकारियां चीन भेज रहा है।

चीन ने खुद अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह फेसबुक के जरिए चीनियों की निजी जानकारी चुरा रहा है। क्या आप जानते हैं कि हमारी सूचनाओं का व्यापार भी होता है? उदाहरण के लिए, आप किसी कोचिंग संस्थान में प्रवेश लेते समय जो व्यक्तिगत जानकारियां देते हैं उन्हें वे अन्य कोचिंग संस्थानों को बेच देते हैं। इसी तरह, आप जब किसी शापिंग माल जाते हैं तो वहां अक्सर ‘आफर’ के नाम पर मोबाइल नंबर और ई-मेल जैसी संवेदनशील जानकारियां ले ली जाती हैं और उन्हें अन्य शापिंग माल वालों को बेच दिया जाता है। स्थानीय स्तर के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह एक बहुत बड़ा बाजार है और टेलीकॉम कंपनियां इससे करोड़ों-अरबों कमाती हैं। फेसबुक पर भी लोगों की जानकारियां बेचने का आरोप लग चुका है।

इन सबके अलावा देश में कुछ ऐसे लोग/संस्थाएं/पार्टियां/समूह हैं जो समाज में सोशल नेटवर्किंग यूट्यूब, फेसबुक, वाट्सएप और ट्विटर के द्वारा इतिहास को गलत बता कर लोगों को गुमराह करते हैं। इन सब मामलों में यूट्यूब सबसे आगे है जैसे- गांधीजी को भगतसिंह की फांसी का जिम्मेदार बताना, जवाहरलाल नेहरू पर संविधान में अनुच्छेद 370 को लाने या डॉ आंबेडकर पर संविधान में सामान्य और अनुसूचित जातियों के मध्य भेदभाव के प्रावधान करने का आरोप लगाना आदि ऐसे तथ्य मिल जाएंगे जो सिर्फ लोगों के मस्तिष्क में गलत सूचनाएं भर रहे हैं। इन सबके अलावा मीडिया भी बहुत हद तक इसके लिए जिम्मेदार है जो देश व समाज में होने वाली घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करता और लोगों को भ्रमित करता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण नए नोटों पर इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी हुई बताना था। कुछ चैनलों ने तो बाकायदा इस पर विशेष कार्यक्रम भी चलाए थे।
’संदीप कुमार, ईसीसी, प्रयागराज

दागी से दूर
सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं को टिकट देने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सभी राजनीतिक दलों की वेबसाइट पर कारण बताने को कहा है। यह फैसला सराहनीय है क्योंकि कई बार फटकार के बाद भी पार्टियां दागी नेताओं को टिकट दे रही हैं। ऐसा लगता है कि चाल-चरित्र की बातें केवल चुनावी भाषणों तक सिमट कर रह गई हैं। जिन नेताओं पर गंभीर धाराओं में आपराधिक मामले दर्ज होते हैं उनसे महिला सुरक्षा और भय मुक्त वातावरण की उम्मीद कैसे कर सकते हैं! सदनों में दागी नेताओं की संख्या बढ़ना चिंताजनक है। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि किसी आपराधिक छवि के उम्मीदवार को टिकट न दें। जनता को भी जागरूक बन कर ऐसे लोगों को चुनावों में वोट नहीं देना चाहिए।
’महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

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