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चौपालः मिसाल का हाल

नालों और पानी की निकासी की व्यवस्था को मजबूत बना कर शहरों में हर वर्ष आने वाली बाढ़ को काफी हद तक रोका जा सकता है।

लगातार चौथी बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हो चुका इंदौर पिछले दिनों आई भारी बारिश में हाल बेहाल हो गया।

लगातार चौथी बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हो चुका इंदौर पिछले दिनों आई भारी बारिश में हाल बेहाल हो गया। ऐसी ही दशा अन्य शहरों की भी रही। स्वच्छता सर्वेक्षण में सर्वोत्कृष्ट रैंक प्राप्त करना बेहतर है, पर स्थानीय निकायों को वास्तविकता को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बारिश के पूर्व सभी शहरों में खाना पूर्ति के लिए नदी-नालों की सफाई की जाती है, ताकि पानी एक जगह एकत्रित नहीं हो और उसका प्रभाव व्यवस्थित बना रहे। पर यह कार्य सिर्फ रस्म अदायगी के लिए होता है। नालों और पानी की निकासी की व्यवस्था को मजबूत बना कर शहरों में हर वर्ष आने वाली बाढ़ को काफी हद तक रोका जा सकता है।
’ललित महालकरी, इंदौर, मप्र

उम्मीद पर दुनिया
कोरोना के प्रकोप ने समूचे विश्व की अवस्था को दयनीय कर दिया है। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक समय ऐसे आएगा, जब सड़कें सुनसान हो जाएंगी और वक्त थम-सा जाएगा। ऐसी अवस्था में लोगों का निराश होना स्वाभाविक है। लेकिन हताश होना विकल्प नहीं है। इतिहास गवाह है, जब-जब मानव जीवन चुनौतियों से घिरा है, तब-तब आवश्यकताओ ने बड़े आविष्कारों की नींव रखी है! यह दौर है खुद को मजबूत बनाए रखने का, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का। जापान जैसा छोटा-सा देश है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने कई शहरों पर परमाणु बम के हमले में बुरी तरह तहस-नहस हो गया था। तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि जापान आने वाले दौर में समूचे विश्व में अपना लोहा मनवा लेगा।

सन 1918 का स्पेनिश फ्लू, जिसमें विश्व की करीब पांच फीसद आबादी काल के गाल में समा गई, उसके बाद भी जीवन का पटरी पर फिर वापस आने को लेकर तमाम आशंकाएं थीं। दो सौ वर्षों के ब्रिटिश काल ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। उस समय फिर स्थिति के ठीक होने के बारे में किसी ने नहीं सोचा था। लेकिन वक्त एक-सा नहीं रहता। इतिहास के पन्ने खंगाले जाएं तो ऐसे लाखों उदाहरण मिल जाएंगे, जिन्होंने विपरीत हालात में असाधारण कार्य करके दिखाया। उम्मीद पर दुनिया कायम है।
’आस्था मुकुल, रांची, झारखंड

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