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चौपाल: चीन के मंसूबे

अमेरिका के दबाव में भारत पहले ही देर कर चुका है। चीन की आर्थिक महत्त्वाकांक्षा सबके सामने स्पष्ट हो चुकी है। ईरान की कमजोर स्थिति का फायदा उठाने के लिए सवा चार सौ अरब डालर का निवेश करना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं है।

Author नई दिल्ली | August 3, 2020 7:57 AM
china banअमेरिका भारत की दोस्ती से बिफरा चीन

जनसत्ता में छपे लेख ईरान पर डोरे डालता चीन में लेखक ने बहुत ही सटीक विश्लेषण किया है। भारत के लिए ईरान से अपने सामरिक संबंधों को फिर से तरोताजा करने की जरूरत है, अन्यथा चीन इसका लाभ उठा लेगा। भारत के लिए जरूरी है कि वैश्विक स्तर पर अपनी विदेश नीति को पुरजोर और संतुलित तरीके से रखे।

अमेरिका के दबाव में भारत पहले ही देर कर चुका है। चीन की आर्थिक महत्त्वाकांक्षा सबके सामने स्पष्ट हो चुकी है। ईरान की कमजोर स्थिति का फायदा उठाने के लिए सवा चार सौ अरब डालर का निवेश करना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। साथ ही, तेल का व्यापार करके चीन मनचाहे दामों में सौदेबाजी करने से पीछे नहीं हटेगा। भारत के साथ गलवान घाटी में उसका रवैया सबके सामने आ गया है। ऐसी स्थिति में भारत को कूटनीति का सहारा लेकर उसके द्वारा एशिया में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के मनसूबों पर पानी फेरना पड़ेगा, तभी स्थिरता कायम की जा सकेगी।
’राजेश कथवाल, हिसार

बाढ़ और सबक
हर साल बारिश आती है और नदियों में बाढ़ भी। जान-माल का भारी नुकसान होता है। बारिश व बाढ़ का यह सिलसिला कोई पहली बार नहीं है। लेकिन दुख की बात यह है कि बारिश और बाढ़ के जाते ही हम फिर चुप बैठ जाते हैं और कोई सबक नहीं लेते। इसका नतीजा अगले साल फिर से तबाही के रूप में देखने को मिलता है। विनाशकारी बाढ़ तो हर साल सबक सिखाती है, लेकिन सवाल है कि हमारी आंखें क्यों नहीं खुलतीं। क्या तबाही से सरकार कोई सबक सीख कर प्राथमिकता के साथ बचाव व संरक्षण के उपायों की युद्ध स्तर पर कोशिश करेगी या ऐसे ही ढर्रा चलता रहेगा!
’हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद (उज्जैन)

भष्ट्राचार का नतीजा
पंजाब के विभिन्न भागों से जहरीली शराब से मौतों की खबर ने एक बार फिर सबको दहला दिया। प्रशासन की ओर से वही घिसा-पिटा बयान का आया कि ‘जांच के आदेश दे दिए गए हैं कोई दोषी नहीं बच पाएगा’। कुछ दिन गुजर जाने के बाद सब लोग इस त्रासद घटना को भूल जाएंगे और जहर के व्यापारी फिर से सक्रिय हो जाएंगे। सरकार फिर से जांच का आदेश देगी और अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेगी। सवाल है कि आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा? अगर पहले की घटनाओं के संबंधित क्षेत्र के थानेदारों एवं पुलिस अधीक्षकों को काम में लापरवाही बरतने के जुर्म में केवल स्थांतरण नहीं, बल्कि नौकरी से बर्खास्तगी और जेल की सजा दी जाती, तो शायद इस बड़े पैमाने की लापरवाही नहीं होती। यह सर्वविदित है कि इस तरह के अपराध का जाल भ्रष्टाचार का हिस्सा है। भ्रष्टाचार केवल पैसों का नहीं होता, बल्कि इंसानों का जान भी लेता है।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी (जमशेदपुर)

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