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चौपाल: देशभक्ति के मायने

मीडिया द्वारा इनके उबलते गुस्से पर ‘छौंका-बघारी’ करना हमारे पूरे सरकारी तंत्र को बौना दिखाने जैसा है।

Author Published on: September 27, 2016 5:37 AM
US lawmaker, India Surgical Strikes, Pok Surgical Strikes, India attack Pok, india vs pakistan, Uri Attackउरी के जिस सेना कैम्प पर हमला हुआ था उसके बाहर का दृश्य। (PTI File Photo)

क्या किसी देश की विदेश नीति, युद्ध / युद्ध विराम अथवा महत्त्वपूर्ण निर्णयों की दिशा मीडिया के ‘वार रूम’ में बैठ कर तय की जा सकती है? मीडिया द्वारा तथ्यों का अनुचित तरीकों से प्रसारण, क्या देश की भोली-भाली जनता की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं है? आजकल उड़ी हमले को लेकर पूरे देश का खून उबल रहा है और ऐसा लगता है (सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विश्लेषणों से) कि अगर इन्हें आज ही मौका मिले तो ये सीमा पर जाकर सारे आतंकी किलों को ध्वस्त कर आएंगे।

उसके भी ऊपर से मीडिया द्वारा इनके उबलते गुस्से पर ‘छौंका-बघारी’ करना हमारे पूरे सरकारी तंत्र को बौना दिखाने जैसा है। कोई कहता है- हमें सिंधु जल समझौता रद्द कर देना चाहिए! कोई कहता है कि पाकिस्तानी कलाकारों को देश निकाला दो! सारे राजनयिक रिश्ते खत्म कर दो! आतंकी ठिकानों को गुप्त अभियानों के जरिये तबाह करने से लेकर सीधी कार्रवाई तक कर डालो, आदि-आदि।

इन सारी भावनाओं को कोई भी भारतीय भलीभांति समझ सकता है, पर एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी चुनी हुई सरकार और दुनिया की ताकतवर सेनाओं में शुमार सेना के तीनों अंगों पर भरोसा करते हुए किसी तरह का उन्मादी या भय से परिपूर्ण सांप्रदायिक माहौल न पैदा होने दें। वरना सीमा पार से भी ज्यादा मुश्किल होगा इस बिगड़े हुए भाईचारे को संभाल पाना!
’पुष्पेंद्र्र सिंह राजपूत, वायु सेना स्टेशन, आगरा.

 

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