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चौपाल: उठता भरोसा

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसका एक मुख्य कारण है कि बैंकिंग क्षेत्र की निगरानी करने वाले नियामक रिजर्व बैंक की लापरवाही। इसी सरकार में यह देखने को मिला है कि रिजर्व बैंक जैसी संस्थाओं में भी पदों की नियुक्ति राजनीति से ओतप्रोत है।

RBI(फाइल फोटो)

हर व्यक्ति अपने धन को सुरिक्षत रखने के लिए चिंतित रहता है। खासतौर से यह चिंता अब और इसलिए भी बढ़ती जा रही है क्योंकि आए दिन बैंकों को लेकर चौंकाने वाली खबरें देखने-पढ़ने को मिल रही हैं। बैंकों का कर्ज लेकर भागने वालों और उस कारण बैंकों का बढ़ता एनपीए और येस बैंक डूबने, पीएमसी बैंक का भट्ठा बैंटने जैसी घटनाओं ने लोगों की नींद उड़ा दी है और इससे लोगों का बैंकिंग व्यवस्था से भरोसा उठ गया है। लोगों को लग रहा है कि उनका पैसा बैंकों में सुरक्षित नहीं है। ऐसे में जनता किस पर भरोसा करें? ऐसी स्थिति में सरकार को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वह बैंकों की नीति में कुछ ऐसे ठोस बदलाव करे जिससे बैंकों की सुरक्षा मजबूत हो और लोगों का पैसा सुरक्षित रहे। तभी लोगों में बैंकों को लेकर भरोसा कायम होगा।
’अमन माहेश्वरी, दिल्ली

नियामक पर सवाल
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसका एक मुख्य कारण है कि बैंकिंग क्षेत्र की निगरानी करने वाले नियामक रिजर्व बैंक की लापरवाही। इसी सरकार में यह देखने को मिला है कि रिजर्व बैंक जैसी संस्थाओं में भी पदों की नियुक्ति राजनीति से ओतप्रोत है। पिछले कुछ सालों में रिजर्व बैंक में शीर्ष नियुक्तियों और सरकार से असहमति के चलते इस्तीफों को लेकर जिस तरह की सिथतियां बनीं, उसका असर बैंक के कामकाज की संस्कृति और साख पर पड़ना लाजिमी है। और यही वजह है कि पिछले कुछ समय में जितने बैंक घोटाले सामने आए हैं, उसमें रिजर्व बैंक की भूमिका पर अंगुलियां उठी हैं। अगर नियामक ही कमजोर होगा तो बैंकों पर कैसे लगाम कसेगा?
’मोहम्मद आसिफ, दिल्ली

निवेशकों को चपत
कोरोना वायरस से दुनिया भर के बाजारों में जिस तरह की गिरावट बनी हुई है, उससे निवेशकों से लेकर सरकारों तक का परेशान होना स्वाभाविक ही है। पिछले गुरुवार को भारत में निवेशकों को ग्यारह लाख करोड़ की चपत लग गई। इसके साथ ही येस बैंक के डूबने की खबर ने भी बाजार को भारी नुकसान पहुंचाया। जहां तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने का सवाल है, तो उसका कोई बहुत ज्यादा फायदा भारत को मिल नहीं पा रहा है। निवेशकों का बाजार में भरोसा बना रहे, इसके लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने होंगे।
’युगल किशोर शर्मा, खांबी (फरीदाबाद)

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