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युवा की आवाज

भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है, लेकिन इसमें उल्लेखनीय यह है कि भारत सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है।

youthसांकेतिक फोटो।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश है, लेकिन इसमें उल्लेखनीय यह है कि भारत सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश है। इसका सरल-सा मतलब यह है कि भारत के पास आज वर्तमान में बेहतर मानव संसाधन उपलब्ध है और अगर भारत इस युवा आबादी का सकारात्मक उपयोग नहीं कर पाया तो हमारे समक्ष भविष्य में एक गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी, क्योंकि यही युवा भविष्य में बूढ़ा भी हो जाएगा। हाल ही में युवा आबादी के रेलवे, एसएससी आदि प्रतियोगिता परीक्षाओं या सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले तबके ने पिछले दिनों में केंद्र सरकार के प्रति रोष व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर ‘रोजगार दो’ जैसे अभियान को ट्विटर के शीर्ष पायदान पर ला दिया था।

जाहिर है कि यह तबका सरकार का ध्यान इस ओर खींचने में लगा है कि किस तरीके से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके पीछे इन युवाओं की कुछ प्रमुख मांगें हैं, जैसे पूर्ण भर्ती प्रक्रिया में सालों क्यों लगते हैं, प्रश्न पत्र में त्रुटियां क्यों, पूर्ण चयन प्रक्रिया को अधिक से अधिक पारदर्शी बनाया जाए आदि। दरअसल, इस सबके चलते केवल उम्मीदवारों का ही भविष्य प्रभावित नहीं होता है, बल्कि इनसे जुड़े लोगों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है। इनके परिवार के अलावा इसका नुकसान देश को भी उठाना पड़ता है। सवाल है कि क्यों नहीं सरकार इस व्यवस्था को दुरुस्त करती है।

इन युवाओं का आंदोलन केवल केंद्र सरकार को लक्ष्य करने तक ही सीमित नहीं है। सरकारी भर्तियों को लेकर लेटलतीफी जैसी जटिल समस्या राज्य स्तर पर भी बेहद चिंताजनक है। मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में भी यही हाल है। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश को लिया जाए, जहां पर मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग 2019 की परीक्षा अभी तक पूर्ण नहीं हो पाई है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न तो प्रधानमंत्री, न मुख्यमंत्री, न ही किसी मंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी। ऐसी क्या वजह है कि सरकारें इतनी निष्क्रिय हो चली हैं कि वे अपनी जवाबदेही से लगातार पीछे हट रही हैं। यह कैसा लोकतंत्र है कि एक वर्ग सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इतने बड़े स्तर पर आंदोलन चलाता है, उसके बावजूद सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगती!

इससे साफ जाहिर होता है कि जब आप सत्ता में हों तो चुप्पी साध लें और जब विपक्ष में हों तो जम कर बयानबाजी करें। हमारे यही राजनेता अपने चुनावी भाषणों में भारत की सबसे अधिक युवा आबादी होने का बखान करते हैं। खासतौर पर हमारे प्रधानमंत्री युवा आबादी का अपने भाषणों में अक्सर हवाला देते नजर आते हैं। ऐसे में युवा सरकारों से यही आशा करते हैं कि उनमें अगर थोड़ी बहुत भी नैतिकता मौजूद है तो वे इस ओर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएं।
’सौरव बुंदेला, भोपाल, मप्र

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