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चौपालः भूख का पेट

एक बार फिर उन दावों की पोल खुल गई है जिनमें भारत के विकासशील से विकसित मुल्क बनने की बात कही जा रही थी।

Author October 17, 2018 2:59 AM
भारत उन देशों में है जहां पर प्रतिवर्ष लाखों टन अनाज या तो सड़ जाता है या बर्बाद हो जाता है।

भूख का पेट

एक बार फिर उन दावों की पोल खुल गई है जिनमें भारत के विकासशील से विकसित मुल्क बनने की बात कही जा रही थी। इसी महीने जारी हुए वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का प्रदर्शन बेहद का चिंताजनक रहा और वह अपनी पुरानी स्थिति से भी पिछड़ता नजर आया। भारत को 119 देशों की सूची में 103 वां स्थान प्राप्त हुआ। वैश्विक भूख सूचकांक के तहत विश्व भर के देशों में लोगों को मिल रहे खानपान, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता व उपलब्धता आदि मापदंडों के आधार पर सूची तैयार की जाती है। पिछले साल भारत इस सूची में 100 वें स्थान पर था लेकिन इस साल 103 वें स्थान पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि भारत के पड़ोसी और उससे बेहद छोटे देश नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश इस सूची में भारत से बेहतर नजर आए। सूची आने के बाद विपक्ष भी सरकार को लगातार घेरता दिख रहा है।

इस रिपोर्ट ने कहीं न कहीं उन तमाम सरकारी योजनाओं की नाकामी की ओर भी इशारा किया है जो आजादी से लेकर अब तक भारत को भूख से मुक्त कराने के लिए बनाई गई थीं। कैसी विडंबना है कि एक तरफ तो भारत मंगल पर पहुंच रहा है पर दूसरी तरफ अपने लोगों को खानपान जैसी मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया कराने में समर्थ नहीं हो पा रहा है। भारत उन देशों में है जहां पर प्रतिवर्ष लाखों टन अनाज या तो सड़ जाता है या बर्बाद हो जाता है।

शक्ति प्रताप सिंह, रश्मि खंड, लखनऊ

विवाद का परिसर

अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय अब अक्सर खबरों में रहने लगा है। कभी जिन्ना की फोटो को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो कभी आतंकियों की वजह से वहां राष्ट्र विरोधी नारे लगाए जाते हैं। कहीं एएमयू भी अब जेएनयू तो नहीं बन रहा? समझ नहीं आ रहा है कि विश्वविद्यालय में राष्ट्र विरोधी नारे क्यों लग रहे हैं?

एक आतंकी की हत्या पर विश्वविद्यालय परिसर में नमाज अदा की जा रही है। अगर किसी आतंकी के लिए देश विरोधी नारे लगाए जाते हैं तो क्या दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए? कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री क्यों उन छात्रों के पक्ष में बयान दे रही हैं जिन्होंने राष्ट्र विरोधी नारे लगाए? जिस देश में छात्र रह रहे हैं उसके खिलाफ नारे लगाना क्या उचित है?

श्री कृष्ण, लोनी, गाजियाबाद

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