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यह रिपोर्ट कार्ड

उनहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस पर लोगों, खास कर बच्चों में इस राष्ट्रीय पर्व में जोर-शोर से भागीदार बनने की खुशी दिखती है। कहीं बच्चों का कोई समूह राष्ट्रगान का अभ्यास कर रहा है तो कोई भाषण देने का। कहीं किसी ‘मुन्नी’ के पिता ने उसके लिए छोटे-छोटे प्लास्टिक के झंडे खरीदे हैं, तो कोई ‘भोला’ किसी […]

Author August 14, 2015 8:55 AM

उनहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस पर लोगों, खास कर बच्चों में इस राष्ट्रीय पर्व में जोर-शोर से भागीदार बनने की खुशी दिखती है। कहीं बच्चों का कोई समूह राष्ट्रगान का अभ्यास कर रहा है तो कोई भाषण देने का।

कहीं किसी ‘मुन्नी’ के पिता ने उसके लिए छोटे-छोटे प्लास्टिक के झंडे खरीदे हैं, तो कोई ‘भोला’ किसी दुकान पर चाय की प्याली साफ करते हुए सोच रहा है कि उसे मुफ्त में जलेबी खाने को मिलेगी।

15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री ने जब लालकिले से ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया था तब वहां मौजूद बच्चों के हाथों में जो प्लास्टिक के झंडे थे वे सीमा पार चीन से बन कर आए थे। आज एक साल बाद 15 अगस्त 2015 से पहले ही भारतीय बाजार फिर इन ‘मेड इन चाइना’ झंडों और उत्पादों से पट गया है। यह मेक इन इंडिया की विफलता का अपने आप में एक रिपोर्ट कार्ड है।

गुलाम हुसैन, मुजफ्फरपुर

 

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