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मानवता हुई शर्मसार

बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध गंभीर चिंता का विषय हैं। सख्त कानून के साथ-साथ जब तक लोगों में नैतिकता की भावना का प्रचार-प्रसार नहीं होगा, तब तक शायद ऐसी घिनौनी घटनाओं पर रोक लगना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।

Author June 10, 2019 4:45 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

हाल में अखबारों में मानवता को शर्मसार करने वाली दो खबरों ने हर किसी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि हमारा सभ्य समाज, दुनिया को नैतिकता-इंसानियत की शिक्षा देने और कन्या पूजा करने वाला देश खुद अनैतिक और गलत राह पर क्यों बढ़ रहा है? क्या लोगों के भीतर मानवता और नैतिकता का पतन हो रहा है? पंजाब में डेढ़ वर्षीय और देवभूमि हिमाचल में पांच वर्षीय के साथ दुष्कर्म की खबर पढ़ने को मिली। इससे पहले भी छोटी-छोटी बच्चियों के साथ जघन्य अपराधों की खबरें पढ़ने-सुनने को मिलती रही हैं। देश का बुद्धिजीवी वर्ग भी घटनाओं पर कम ही बोलता या लिखता देखा जाता है। देश में समय-समय पर मासूम बच्चियों के साथ अमानवीय काम करने वाले आखिर फांसी के फंदे तक क्यों नहीं पहुंचते? क्यों सरकारें और कानून दरिंदो को सख्त सजा देने में देरी करते हैं? आखिर कब बेटियां देश में सुरक्षित होंगी? ऐसे कई सवाल हैं जो आज भी हरेक के दिल दिमाग में उठ रहे हैं। बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध गंभीर चिंता का विषय हैं। सख्त कानून के साथ-साथ जब तक लोगों में नैतिकता की भावना का प्रचार-प्रसार नहीं होगा, तब तक शायद ऐसी घिनौनी घटनाओं पर रोक लगना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

बढ़ता वायु प्रदूषण
पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। इस साल की थीम ही वायु प्रदूषण रखी गई है। इस दिवस का महत्व तेजी से बढ़ता जा रहा है क्योंकि दिन-प्रतिदिन वायु प्रदूषण से समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार दस में से नौ व्यक्ति प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। सयुंक्त राष्ट्र ने वायु प्रदूषण होने के कुछ मुख्य कारण गिनाए हैं जैसे की घरेलू र्इंधन, वाहनों का धुआं, खेतों में पराली जलाना, कारखानों से निकलने वाला जहरीला धुआं आदि। इस तरह वायु प्रदूषण से लोगों को दमा व अन्य घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। धरती पर बढ़ती आबादी की वजह से वन्य क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं जिससे पृथ्वी का ताप बढ़ रहा है। चीन दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कर रहा हैं क्योकि औद्योगिक गतविधियों के लिए चीन बेहिसाब कोयले को जलाता है। इसका नुकसान उसके पड़ोसी मुल्कों को भी भुगतना पड़ रहा है। अमेरिका जो सबसे जिम्मेदार देश कहलाता है, कार्बन उत्सर्जन के मामले में दूसरे नंबर पर है और भारत तीसरे पर है। इसलिए वायु प्रदूषण को सही मायने में हराने के लिए जहरीली गैसों का उत्सर्जन कम करने और पेड़-पौधे लगाने का अभियान चलाने की जरूरत है। तभी पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पूरा किया जा सकता है।
’निशांत महेश त्रिपाठी, नागपुर

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