बढ़ती साख

अफगान मुद्दे पर दिल्ली में होने जा रही विभिन्न देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक इस बात को दर्शाती है कि भारत का आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा नजरिया है।

सांकेतिक फोटो।

अफगान मुद्दे पर दिल्ली में होने जा रही विभिन्न देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक इस बात को दर्शाती है कि भारत का आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा नजरिया है। उसके नेतृत्व की दूरगामी सोच ने मध्य एशियाई देशों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भारत के सहयोग के बिना आतंकवाद से लड़ना एक कठिन चुनौती होगा और वह भी तब जब अफगानिस्तान में आतंकवाद को पनाह देने का काम परमाणु संपन्न देश चीन और पाकिस्तान मिल कर कर रहे हैं।

इस बैठक में रूस और ईरान जैसे देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति की संभावना से इस बात को और अधिक बल मिल जाता है कि मध्य एशिया में कुछ देश भारत को एक उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में देख रहे हैं, जिसका लक्ष्य समूचे विश्व को शांति और सद्भावना के सूत्र में बांध कर उनके साथ-साथ स्वयं के सामरिक हितों की पूर्ति करना भी है।

इससे पहले भी वर्ष 2018 और 2019 में आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर हुई एनएसए स्तर की बैठक का बहिष्कार कर पाकिस्तान बार-बार क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए चुनौती खड़ा करता आया है, पर इस बार उसके लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा, क्योंकि तालिबान के साथ उसके नजदीकी संबंधों ने दुनिया के सामने उसकी पोल खोल दी है। वहीं दूसरी ओर इस बैठक की मेजबानी कर भारत ने तालिबान के सहारे विस्तारवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को भी अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य कर दिया है।
’पारस जैन, मेरठ

चीन की चाल

अभी पूरी दुनिया कोरोना महामारी के दंश से नहीं उबर सकी है। कई देश अपनी अर्थव्यवस्था को पुन: पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। भारत भी अभी हर नागरिक को कोरोना टीका लगाने में व्यस्त है। पूरी दुनिया कोरोना महामारी के जनक के रूप में चीन को देख रही है और महामारी से राहत पहुंचाने वाले देश के रूप में भारत को देखा जा रहा है।

चीन इस आपदा को अवसर में बदलते हुए भारत सहित कई देशों के साथ सीमा विवाद प्रारंभ कर दिया है। महामारी के दौर में पैंतालीस वर्षों के बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई। अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए चीन ने अपने सीमा कानून में बदलाव किया है। इस कानून के जरिए सीमा पर तनाव और अशांति फैल रही है। चीन का मकसद भारत की सीमाओं का अतिक्रमण करना है।

सभी पड़ोसी देशों के साथ चीन का सीमा विवाद चल रहा है। चीन की विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए जापान की पहल पर क्वाड का गठन किया गया। क्वाड संगठन में भारत, जापान, अमेरिका और आस्ट्रेलिया हैं। भारत को क्वाड में अग्रणी भूमिका निभाते हुए चीन के मंसूबों पर पानी फेरना होगा। भारत-चीन सीमा विवाद का हल तिब्बत की आजादी में छिपा हुआ है। भारत को तिब्बत की आजादी के लिए प्रयास करना चाहिए।
’हिमांशु शेखर, केसपा, गया

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