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चौपाल: असुरक्षित महिलाएं

एक तरफ हम रामराज्य लाने के दावे कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आए दिन महिलाओं के साथ दरिंदगी की घटनाएं घट रही हैं। यह समाज हम सबका समाज है और इसको सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी हम सब सबकी है। हमें एक बार फिर महिला सुरक्षा के लिए आवाज उठाने की जरूरत है।

crime, crime newsइस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सांकेतिक तस्वीर।

राजधानी दिल्ली पिछले हफ्ते बारह साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने एक बार फिर रोंगटे खड़े करल दिए हैं। इस तरह की घटनाएं हमारे समाज के भीतर खत्म होती मानवता और बढञती पाश्विकता का परिचायक हैं। हर दिन बच्ची, महिलाओं यहां तक कि बुजुर्ग महिलाओं के साथ भी घिनौनी हरकतों की खबर मन को अंदर से विचलित कर देती हैं। लेकिन हम इन खबरों के इतने आदि हो गए हैं कि हम दो-तीन दिन घटना पर दु:ख जताते हैं और फिर वही हाल हो जाता है। हर समय महिलाएं डर के साय में जी रही हैं। मौजूदा घटना यह साबित करती है कि हमारे समाज में कोई बदलाव नहीं आया, न ही किसी के भीतर कानून का खौफ पैदा हुआ है। एक तरफ हम रामराज्य लाने के दावे कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आए दिन महिलाओं के साथ दरिंदगी की घटनाएं घट रही हैं। यह समाज हम सबका समाज है और इसको सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी भी हम सब सबकी है। हमें एक बार फिर महिला सुरक्षा के लिए आवाज उठाने की जरूरत है।
’आशीष, दिल्ली

लापरवाही की आग
अमदाबाद के कोविड अस्पताल में लगी आग ने एक बार फिर अस्पताल प्रशासन को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। अस्पतालों में आग लगने की खबरें और नाहक ही लोगों के इस आग में झुलस जाने की खबरें आम हो गई हैं। दाहिर है, अभी तक इस तरह की घटनाओं से सरकारों और प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा है। इसीलिए बार-बार इस तरह के दर्दनाक हादसे देखने को मिलते हैं। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि अभी की देश के कई बड़े अस्पतालों में न तो आग बुझाने के पूर्ण संसाधन उपलब्ध है और न ही अस्पताल प्रशासन ने अग्नि शमन से एनओसी यानी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेने की जरूरत समझी है। अब सवाल ये उठता है कि अगर अस्पतालों के पास एनओसी ही नहीं होगी और ऐसे में अग्निकांड हो जाए तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
’प्राची, दिल्ली विवि. दिल्ली

कलाकारों की मौत
आजकल एक के बाद एक कलाकारों की रहस्यमयी मौत की दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। सबसे पहले आठ जून को सुशांत सिंह राजपूत की सेक्रेटरी दिशा सालियान की रहस्यमय मौत हुई। फिर 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर ली है। इसके बाद पिछले हफ्ते ही टेलीविजन जगत के मशहूर कलाकार समीर शर्मा का शव पंखे से लटका हुआ मिला। इसके दो दिन बाद ही भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री अनुपमा पाठक ने भी जान दे दी। लगातार हो रही इस तरह की घटनाएं हहैरान करने वाली हैं। एक ही शहर में एक ही क्षेत्र से जुड़े लोग आखिर ऐसा कदम उटाने को क्यों मजबूर हो रहे हैं। क्या इन सभी की मौत का राज एक दूसरे से जुड़े हुए है?
’हिमांशु शेखर, गया

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