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चौपाल: साहचर्य का जीवन

यह तथ्य है कि पारिस्थितिकी तंत्र में जितने भी जीव-जंतु हैं, उन सबकी उपयोगिता है। पृथ्वी पर उन सबके उतने ही अधिकार हैं, जितने मानव के हैं। लिहाजा हमारी जीवन शैली किसी भी तरह प्रकृति से साहचर्य की होनी चाहिए, न कि भोग की।

Author Updated: January 15, 2021 9:53 AM
coronaसांकेतिक फोटो।

हालांकि कोविड-19 के स्रोत अभी अज्ञात है, लेकिन वैक्सीन तैयार है, अब बस महामारी से निजात पाने की कसर बाकी है। ऐसे में बर्ड फ्लू की दस्तक ने हमारी चिंताओं में इजाफा किया है। दोनों बीमारियों का संबंध प्रवासन से है। चाहे मानव या पशु पक्षी। इसे रोकना असंभव है, क्योंकि प्रवासन भी प्राकृतिक परिघटना है।

पूर्णतया स्थानिक हुआ भी नहीं जा सकता है। इस संदर्भ में करणीय और अकरणीय के बीच एक मानक होना चाहिए जो कारोबारी, पर्यावरणीय चिंताओं के बीच तालमेल स्थापित करे। जिस तरह से विज्ञानियों का आकलन है कि अब आने वाले वर्षों में जीवाणु एवं विषाणुजनित बीमारियों के प्रकोप बढ़ेंगे, वैसे में संपूर्ण विश्व समुदाय को इस मुद्दे पर गंभीर होना होगा।
’मुकेश कुमार मनन, पटना, बिहार

दोहरा चेहरा

भारत ने जिस प्रकार से सीमा में घुसे चीनी सैनिक को पकड़ कर चीन को वापस सौंप दिया, वह काबिलेतारीफ तो है ही, जिसकी प्रशंसा चीन के रक्षा विशेषज्ञ भी कर रहे हैं, मगर भारत को यह भी सोचना चाहिए कि क्या वह चीन से भी इसी सद्भावना की अपेक्षा रख सकता है!

एक ओर चीन ने नई दिल्ली की तारीफ के पुल बांधे हैं तो दूसरी ओर उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अलकायदा प्रतिबंध कमेटी के अध्यक्ष बनने पर रोक लगा दी है, जो चीन के दोगलेपन को जाहिर करती है। ऐसी स्थिति में चीन को कितना भरोसेमंद माना जाना चाहिए। संबंध हमेशा दोतरफा टिकाऊ होते हैं।
’पारस जैन, मेरठ, उप्र

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