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नशे के विरुद्ध

आमतौर पर महिलाएं शराब नहीं पीती हैं और पीने वाले मर्द को भी पसंद नहीं करतीं।

Alcohalसांकेतिक फोटो।

आमतौर पर महिलाएं शराब नहीं पीती हैं और पीने वाले मर्द को भी पसंद नहीं करतीं। इसी तरह कुछ महिलाएं शराबी मर्द को घर में प्रवेश तक नहीं देतीं, तो कुछ ऐसी हैं जो वर के रूप में वरण नहीं करतीं। मध्यप्रदेश के गुना जिले की चाचौड़ा जनपद स्थित एक गांव में शराब के खिलाफ जागरूकता की महिलाओं ने ऐसी अनोखी अलख जगाई है कि बीते बारह वर्ष से गांव में शराबबंदी लागू है।

इस अभियान के तहत वहां शराबी से तो पांच सौ रुपए जुमार्ना वसूला ही जाता है, लेकिन बाहरी व्यक्ति भी अगर शराब पीकर गांव में प्रवेश करे, तो उससे भी जुर्माना वसूल किया जाता है। दरअसल, इस तरह के जागरूकता अभियान को महिलाओं को अनुकरणीय मानते हुए सक्रियता के साथ अग्रणी होकर चलाना चाहिए, ताकि बच्चों को शिक्षित कर भविष्य को सुनहरा बनाया जा सके।जिन गांव, मोहल्ले या वार्ड में शराब की दुकानें होती हैं, वहां की महिलाओं को संगठित होकर अपने स्तर पर ऐसे ही जागरूकता अभियान का अलख सतत जलाने की जरूरत है, क्योंकि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इस अभियान को सफल और सार्थक करने में सक्षम और कारगर साबित हो सकती हैं।
’बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, उज्जैन, मप्र

गहराती आशंका

कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले साल लगाई गई पूर्णबंदी के दौरान समूचे विश्व के लोगों की आमदनी में कमी आई। आमदनी में कमी आने का मुख्य कारण नौकरियां जाना और कार्य की अनुपलब्धता ही रही। हर पांचवें व्यक्ति को भोजन खरीदने के लिए पैसा नहीं होने के कारण भूखे रहने पर मजबूर होना पड़ा। भारत में महामारी के कारण पिछले साल मार्च में राष्ट्रव्यापी पूर्णबंदी की घोषणा की गई थी, जिसके कई महीने बाद प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील दी गई। अब फिर कोविड-19 के मामलों में इजाफा होने की खबरें हैं।

और कुछ राज्यों के कुछ इलाकों में पूर्णबंदी की घोषणा भी हो गई। चिंताजनक स्थिति यह है कि बंदी से पहले ही करीब सत्तर प्रतिशत लोगों की मासिक आय सात हजार रुपए थी और शेष लोगों की मासिक आय तीन हजार रुपए थी। पहले से ही इतनी कम आय में भी गिरावट इस बात को रेखांकित करती है कि संक्रमण का इन लोगों पर कितना बुरा असर पड़ा है। ऐसे तमाम लोग हैं, जिन्हें खर्च चलाने भर के लिए जमीन बेचने तक की नौबत आ गई। अब अगर एक बार फिर देश में पूर्णबंदी लगाई गई तो अवश्य ही स्थिति और भयावह हो जाएगी, जिससे उबरने में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा वक्त लगेगा और फिर से देश की अर्थव्यवस्था बहुत नीचे गिर जाएगी।
’निधि जैन, गाजियाबाद, उप्र

विकास की जमीन

त्योहार बड़ा या छोटा हो, लोग मनाते दोनों हैं। लोगों के मन में उत्साह की कोई कमी नहीं होती है। उसी प्रकार लोकतंत्र का महापर्व चुनाव भी है। किसी भी राज्य में लोगों के लिए जितना ही उत्साहवर्धक और महत्त्वपूर्ण विधानसभा चुनाव होता है, उतना ही पंचायत चुनाव भी। पूरे देश के विकास पर ध्यान देने से पहले अपने घर, गांव आसपास की विकास पर ध्यान दिया जाए तो देश का विकास अपने आप हो जाएगा। बिहार में अभी पंचायत चुनाव सामने है। अब यह लोगों पर निर्भर करता है कि वे अपने पंचायत के लिए किसे चुनते हैं। जड़ मजबूत होगा, तो पूरा देश मजबूत रहेगा।
’नितेश झा ‘निक्की’, मधुबनी, बिहार

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