कर की अहमियत

सरकार ने देश में आर्थिक कर में पारदर्शिता लाने के लिए जीएसटी जैसा फैसला लिया था, लेकिन इसमें कुछ कमियां थीं, जिनके कारण इसके लिए बार-बार नियम बदलने पड़े थे।

सांकेतिक फोटो।

सरकार ने देश में आर्थिक कर में पारदर्शिता लाने के लिए जीएसटी जैसा फैसला लिया था, लेकिन इसमें कुछ कमियां थीं, जिनके कारण इसके लिए बार-बार नियम बदलने पड़े थे। देश की आर्थिक व्यवस्था को सुधारने में कर प्रणाली का बहुत बढ़ा योगदान होता है, लेकिन कर व्यवस्था में जन-भागीदारी बढ़ाने और कर के प्रति जन-जन को जागरूक करने के लिए सरकार को प्रयास करने की जरूरत है।

देश के विकास में हर तरह के कर बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं या यों भी कहा जा सकता है कि कर देश के विकास का आधार होते हैं। कर इकट्ठा करके राज खजाना भरने की परंपरा बहुत पुरानी रही है। यह अलग बात है कि कर इकट्ठा करने की प्रक्रिया में अंतर आ गया है। प्रक्रिया को अगर और आसान बना दिया जाए तो आमजन भी कर देने के प्रति रुचि दिखाएगा।

सरकार को चाहिए कि वह करों की कमाई में पारदर्शिता लाने के लिए भी कुछ कदम उठाए यानी करों की कमाई की बैलेंस शीट मीडिया के जरिए जन-जन तक पहुंचाए। अगर सरकार देश के हरेक नागरिक को अच्छी सुविधा, बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी, बेरोजगारों को उनकी योग्यता और अनुभव के अनुसार भत्ता या नौकरी का इंतजाम करे और बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए गंभीरता दिखाए तो देश का आमजन भी हर तरह के कर देने के प्रति गंभीरता दिखाएगा।
’राजेश कुमार चौहान, जलंधर, पंजाब

वे फेरीवाले

बचपन में हमने अपनी दादी और नानी से कई किस्से और कहानियां सुनी थीं, जिसमें एक आदमी होता है जो खिलौने, टाफियां, फल, फूल, चाट, पानी पुरी और भी चटपटी चीजें हमारी गली-मोहल्ले और गांव-शहरों में ठेला लेकर आता था। एक वह समय था, जब फेरी वाले की आवाज से हम घर से बाहर निकल जाते थे। लेकिन अब बड़े-बड़े शापिंग माल, बहुराष्ट्रीय कंपनियां बाजार में आ गई हैं। अब चाहे सब्जी खरीदना हो, कपड़े, मिठाई, आइसक्रीम, भुने चने, चाट, साबुन, खिलौने या फिर घर की उपयोगी सामग्री हो, सारी चीजें आनलाइन घर में आ जाती हैं।

इस बदलाव ने फेरी वालों के पेट पर लात मार दी है। जब फेरीवाला गली-मोहल्ले में आता था तब सबसे पहले अनोखे ढंग से घंटी बजाता था, फिर मीठे बोल बोल कर सामान का नाम बताता था। इनका यह तरीका आत्मीयता, अपनापन और प्यार के भाग को दर्शाता था। लेकिन अफसोस कि आज के तकनीकी युग ने इन लोगों की रोजी-रोटी छीन ली है। फेरीवाले तेज ठंड, गर्मी, बरसात या फिर भूकम्प आ जाए तो भी हर परिस्थिति में हमारे दरवाजे पर पहुंचते थे। अब वे फेरीवाले किस्से-कहानियों में मौजूद रहेंगे।
’रिशु झा, फरीदाबाद, हरियाणा

शर्मनाक बयान

कंगना रनौत का आजादी को लेकर बयान बेहद ही दुखद और शर्मसार कर देने वाला है। यह न सिर्फ स्वतंत्रता सेनानियों के लिए, बल्कि समस्त देशवासियों के लिए दुखद है। जिनके प्यार की बदौलत ये फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सफल हुर्इं, आज उन्हें ही उनके इतिहास को लेकर भ्रमित कर रहीं हैं। उनके खिलाफ आवाज उठाने पर पद्म पुरस्कार लौटाने की धमकी देकर वे खुद को सही साबित करने का प्रयास करती हैं।

ऐसे में क्या यह जरूरी नहीं कि सरकार ऐसी बेतुकी बयानबाजी को लेकर कोई सख्त कार्रवाई करे, ताकि आगे देश की प्रतिष्ठा, इतिहास या सम्मान को लेकर कुछ भी अनैतिक बोलने से पहले दो बार सोचना पड़े। कंगना को यह समझना चाहिए कि शब्द ही व्यक्ति को ऊंचा उठाते हैं और वही शब्द उसे नीचे जमीन पर भी ले आते हैं।
’अभिषेक जायसवाल, सतना, मप्र

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