आशा निराशा

पिछले कुछ सालों से तमाम राज्य सरकारें शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में अक्षम रही हैं।

बेरोजगारी बनी समस्‍या। फाइल फोटो।

पिछले कुछ सालों से तमाम राज्य सरकारें शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में अक्षम रही हैं। लाखों युवा बड़े शहरों में रह कर सरकारी नौकरी की तैयारी पिछले कई सालों से कर रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया सुचारु रूप से नहीं होने के कारण उनके समक्ष आर्थिक समस्या, अधिक उम्र के हो जाने से आगामी भर्ती प्रक्रिया के लिए अयोग्य होने की समस्या खड़ी हो चुकी है और वे घर वालों का दबाव आदि कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। मध्य प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया का पिछले तीन सालों से मानो सूखा पड़ा है। मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राज्य सिविल सेवा परीक्षा 2019 आरक्षण के दावपेच में फंसी है, कृषि विस्तार अधिकारी का प्रश्न पत्र लीक हो जाने के कारण निरस्त कर दी गई, पुलिस आरक्षक भर्ती के फॉर्म भरे एक साल से अधिक हो जाने के बाद भी अभी तक परीक्षा कराने में सरकार रुचि नहीं दिखा रही है।

इसके अलावा अन्य विभागों में हजारों रिक्त पद होने पर भी केवल आश्वासन दिया जाता है कि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इस तरह झूठे आश्वासन देकर पिछले कई सालों से परीक्षार्थियों और युवाओं के भविष्य को अंधकार में रखा जा रहा है। इसलिए केंद्र सरकार सहित मध्य प्रदेश राज्य सरकार और अन्य राज्य सरकारों को चाहिए कि भर्ती प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी करे। जरा उनके बारे में सोच कर देखिए, जो सिर्फ इसलिए अवसरों से वंचित हो जाएंगे, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया के रुके होने के कारण उम्र निकल जाएगी और वे चारों तरफ अभाव और बंदी के दौर में शेष जीवन संघर्ष के लिए अभिशप्त हो जाएंगे।
’रूपेश मर्सकोले, बालाघाट, मप्र

पड़ोस की चुनौती

अफगानिस्तान में अमेरिका द्वारा आत्मसमर्पण का पूरे भारतीय उपमहाद्वीप समेत अन्य पड़ोसी देशों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जहां भारत को अपना रक्षा बजट बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा, वहीं भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ व्यापार में भारी कटौती का सामना भी करना पड़ेगा। महामारी के कारण भारत को पहले ही अपने स्वास्थ्य बजट में बड़े पैकेज घोषित करने पड़ रहे हैं। कुल मिला कर भारत के सकल घरेलू उत्पाद और विकास दर में भारी गिरावट दर्ज हो सकती है।

अफगानिस्तान की अशांति भारत के लिए इससे बड़े संकट भी पैदा कर सकती है। भारत को न केवल आर्थिक, सीमाई मोर्चों, बल्कि आंतरिक मोर्चे पर भी सतर्क रहना होगा। अगर तालिबान, अलकायदा और अन्य आतंकी समूह पश्चिम एशिया तथा खाड़ी के देशों में अपना प्रभाव बढ़ा कर क्षेत्र को अशांत करने की जुगलबंदी करते हैं तो भारत को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर बहुत विपरीत असर पड़ सकता है। उस स्थिति में भारत की विशाल जनसंख्या बेकाबू महंगाई की मझधार में फंस सकती है। आने वाला समय पूरे क्षेत्र, खासतौर पर भारत के लिए बेचैनी पैदा करने वाला हो सकता है। उस समय भारत के सभी राजनीतिक दलों को एकमत होकर केवल भारत हित की नीति का अनुसरण करना ही होगा।
’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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