ताज़ा खबर
 

चौपालः लापरवाही की आग

आग से खेलते समय कभी-कभी छोटे बच्चे घर को राख में बदल देते हैं। कभी-कभार इसमें कई जानें, संपत्ति आदि नष्ट हो जाती हैं और एक से अधिक घर बुरी तरह से जल जाते हैं।

आग से खेलते समय कभी-कभी छोटे बच्चे घर को राख में बदल देते हैं।

हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है। मंडी, कुल्लू, शिमला, किन्नौर, चंबा, लाहौल स्पीति और सिरमौर के कई हिस्से पहाड़ियों में स्थित हैं। हिमाचल प्रदेश हिमालय की सीमा का एक हिस्सा है। यहां ऐसे घर हैं, जो अधिकतम लकड़ी से बने हैं। गौशाला और आवास संयुक्त हैं। घर के एक हिस्से में सूखी घास सर्दियों के चारे के रूप में रखी जाती है। यह घास आग लगने पर मृत्यु तुल्य हो जाती है, क्योंकि अधिकतर घरों में लकड़ी का उपयोग खाना पकाने के ईंधन के रूप में किया जाता है। केवल आग की एक चिंगारी घरों को राख में बदलने के लिए पर्याप्त है।

यह जंगल में दावानल फैल जाने से इतर एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। राज्य में हर साल इस तरह की घटनाएं होती हैं। आग से खेलते समय कभी-कभी छोटे बच्चे घर को राख में बदल देते हैं। कभी-कभार इसमें कई जानें, संपत्ति आदि नष्ट हो जाती हैं और एक से अधिक घर बुरी तरह से जल जाते हैं। पिछले दिनों कुल्लू जिले में एक घर आग लगने से जल गया और इसके निवासियों को खुले आसमान के नीचे भागने और रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। जाहिर है, ऐसे में प्रशासन की मदद पर्याप्त नहीं होती है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए यह हमारा कर्तव्य है कि घर के परिसर के बाहर घास रखी जाए और इसके लिए सरकार शेड बनाने के लिए सहायता प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, घरों में इलेक्ट्रिकल वायरिंग उचित और टिकाऊ होनी चाहिए, ताकि समस्या को और गंभीर होने से रोका जा सके।
’नरेंद्र कुमार शर्मा, मंडी, हिमाचल प्रदेश

दोहरी मार
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी अर्थव्यवस्था के तिमाही आंकड़े काफी भयावह हैं। यों पिछली कई तिमाहियों से अर्थव्यवस्था में गिरावट पहले ही जारी थी, वही इस तिमाही में यह रिकॉर्ड गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट बन गया है। कृषि क्षेत्र को छोड़ लगभग सभी क्षेत्रों में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई है। हालांकि यह प्रभाव पूर्णबंदी के दौरान व्यावसायिक गतिविधियों के ठप्प होने का परिणाम हो सकता है। लेकिन अर्थव्यवस्था में चिंताजनक स्थिति पहले से ही बनी हुई थी। ताजा आंकड़ा कई संस्थाओं और विशेषज्ञों के पूवार्नुमान से भी बहुत नीचे रहा। इसे पूर्ववर्ती तिमाहियों की स्थिति से जोड़ने पर स्थिति और भी चिंताजनक दिखती है।

हालांकि पूर्णबंदी में ढील के बाद अर्थव्यवस्था के फिर गति पकड़ने की संभावनाएं बन रही हैं। लेकिन अब सरकार को विनिर्माण और उद्योग क्षेत्र के लिए उपयुक्त नीति लागू कर उसे पूर्वस्थिति में लाने का प्रयत्न करना होगा। उपभोक्ता मांग और निवेश बढ़ाने पर बल देना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रोत्साहन पैकेज और अन्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम वर्ग तक पहुंचे। मजदूर, श्रमिक वर्ग उद्योगों में कार्य के लिए प्रोत्साहित हों। तभी अर्थव्यवस्था को फिर गतिशील किया जा सकेगा।
’प्रतीक महेरी, उदयपुर, राजस्थान

कौन जिम्मेदार
‘भ्रष्टाचार का पुल’ (संपादकीय, 1 सितंबर) पढ़ा। पुलों के गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। सवाल है कि आखिर गड़बड़ी कहां है? पुलों को बनाने में कहीं न कहीं लापरवाही, गड़बड़ी और भ्रष्टाचार होता है, इसीलिए आकलन के बावजूद ये पुल बाढ़ के झटके नहीं बर्दाश्त कर पाते या फिर बिना किसी वजह के ही ढह जाते हैं। निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने के अलावा रखरखाव में खामी भी जिम्मेदार महकमों की होती है। हादसे हो जाने के बाद जांच चलती रहती है, लेकिन इस बीच फिर कोई इसी तरह की अगली घटना सामने आ जाती है। आखिर यह कैसे चलता रहता है?
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर, मप्र

Next Stories
1 चौपालः गिरावट का अर्थ
2 चौपाल: आपदा में पशु
3 चौपाल: विवेक की शिक्षा
ये पढ़ा क्या?
X