विभाजित कल्याण

इससे बड़ी विडंबना होगी कि एक तरफ आम जनता महंगाई से कराह रही है तो दूसरी तरफ महंगाई भत्ता बढ़ाया जा रहा है।

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कांग्रेस पार्टी बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साध रही है। (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

इससे बड़ी विडंबना होगी कि एक तरफ आम जनता महंगाई से कराह रही है तो दूसरी तरफ महंगाई भत्ता बढ़ाया जा रहा है। सरकार ने महंगाई भत्ता सत्रह फीसद से अट्ठाईस फीसद कर दिया है। यह सब केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए होगा। इसके अलावा, कोरोना ने कितने लोगों की नौकरी छीनी, उससे घर का बजट बिगड़ा और अब ये महंगाई रुला रही हैं, उससे सरकार को कोई मतलब नहीं लगता। क्या कभी यह सुना गया है कि निजी और असंगठित क्षेत्रों को भी सरकार महंगाई भत्ता देने जा रही है? यानी सरकारी बाबू रोज ब्रेड-बटर खाए और आम जनता महंगाई के कारण रोजी-रोटी के जुगाड़ में परेशान रहे।

केंद्र के इस फैसले के बाद अब कुछ राज्यों में जहां अगले वर्ष चुनाव हैं, वे भी ऐसा कदम उठाने की कोशिश में होंगे, भले ही बाकी लोग रोजी-रोटी की चुनौती का सामना करें। जब देश में पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस से लेकर घरेलू खानपान की चीजें, जिसमें खासकर खाद्य तेल बेहद महंगे हो चुके हैं, जब पूरा देश महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रहा है और राहत की उम्मीद कर रहा है, ऐसे में कुछ प्रतिशत लोगों का खयाल रखना कैसे देखा जाएगा?
’देवानंद राय, दिल्ली

नेपाल की राह

नेपाल की कमान नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने संभाली है। प्रधानमंत्री पद की गरिमा व देश के प्रति हितार्थ व देउबा से भारत को भी उम्मीदें हैं। विगत समय भारत-नेपाल के रिश्ते जिस तरह प्रभावित हुए, उसकी उम्मीद नहीं थी। दोनों देशों के प्राचीन मित्रतापूर्ण संबधों की बात करें तो कभी दरार नहीं रही। पिछले कुछ सालों में पूर्व प्रधानमंत्री ओली की बोली के बदलते स्वर, चीन की विस्तारवादी नीति की गिरफ्त के चलते भारत के साथ संबंधों की अनदेखी मित्रतापूर्ण संबंधों में गत्यावरोधक बन कर उभरे।

पाकिस्तान को छोड़ दें तो आमतौर पर भारत के पड़ोसी देशों से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं। नेपाल तो भारत का अभिन्न मित्र रहा है। इसमें कोई दो मत नहीं कि भारत ने नेपाल का हरदम साथ दिया। नेपाल को अब भारत की दोस्ती का खयाल रखना चाहिए। प्रधानमंत्री देउबा से भारत के संबंधों को लेकर बहुत उम्मीदें है। अब नए सिरे से भारत के साथ राजनीति, आर्थिक, व्यापारिक और अन्य संबंधों में फिर मजबूती लाना चाहिए, ताकि दोनों देशों के पुराने रिश्तों को और मित्रतापूर्ण संबंध को सार्थकता मिल सके।
’योगेश जोशी, बड़वाह, मप्र

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