बढ़ता खतरा

यह तो सभी जानते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी संभावना है।

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तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Pixabay.com)

यह तो सभी जानते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी संभावना है। बीच में सुनने में आया था कि कोरोना मामलों में गिरावट आई है। तब ऐसा लगा कि शायद हम यह जंग जीत गए हैं और कोरोना जा चुका है, लेकिन फिर मामले बढ़ने लगे हैं। जो राज्य आदर्श रूप में दिखाए जा रहे थे, आज सबसे ज्यादा हालात वहीं खराब हैं। हम देख चुके हैं कि कोरोना अप्रैल में किस तरह तेजी से फैलना शुरू हुआ था और हालत इतने बदतर हो गए कि आॅक्सीजन और बेड के लिए लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

इसीलिए तीसरी लहर का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार  कई तरह से लोगों को टीके के बारे में अवगत करा रही है और वह लगातार प्रयास कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों का टीकाकरण हो जाए। पर चिंता की बात यह है कि जिस गति से टीकाकरण बढ़ रहा है, दूसरी तरफ उतनी ही तेजी से लोगों में लापरवाही भी दिख रही है। बाजारों, मॉलों और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं, मानो कोरोना चला गया हो। इसीलिए तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है।

हालांकि किसी को नहीं पता कि तीसरी लहर कब आएगी, लेकिन जिस कदर लापरवाही बरती और कोरोना नियमों का धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है, उससे तो यही आशंका सता रही है कि तीसरी लहर को आने से कोई नहीं रोक पाएगा।
’दिव्या शर्मा, नोएडा
युवा चेहरों के भरोसे

घटते जनाधार और अनेक राज्यों में करारी हार से कांग्रेस तिलमिला उठी है। प्रियंका वाड्रा कांग्रेस की नैया पार लगाने के लिए यूपी में इन दिनों किसानों का साथ दे रही हैं। कांग्रेस नए चेहरे पार्टी में शामिल कर रही है। जेएनयू छात्र संघ नेता कन्हैया कुमार और गुजरात के युवा नेता जिग्नेश मेवाणी उसके साथ आ गए हैं। भाषणबाजी में माहिर कन्हैया मंच से मोदी की आलोचना करते नहीं थकते। जो भी मोदी की आलोचना करता है, उसे कांग्रेस गले लगाती है। मोदी की विकास नीतियों और विदेशो में बढ़ती भारत की साख से हड़बड़ाहट में कांग्रेस ने आपा खो दिया है। इसलिए अब वह युवाओं को चुनाव में खड़ा करना चाहती है। कन्हैया और मेवाणी ने कांग्रेस के बैनर तले एक सभा कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

इस वक्त देश में किसानों की सबसे ज्यादा फिक्र कांग्रेस को है। जबकि हकीकत यह भी है कि कांग्रेस के कार्यकाल में हजारों किसानों ने आत्महत्या की। किसान अब आत्महत्या क्यों नहीं करते। कांग्रेस की नीतियों ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है। राहुल की मोदी-विरोधी नीति ने उसे धरातल पर लाकर पटक दिया। मोदी ने सात सालों में भारत को जो इज्जत और शोहरत दिलाई है, वह कांग्रेस साठ सालों में भी नहीं दिला पाई। युवा चेहरों के भरोसे राजनीति चमकाने निकली प्रियंका वाड्रा को कांग्रेस के भूतकाल को टटोलना चाहिए। भाजपा ने आम आदमी को जीने की कला सिखाई है। उसे नागरिक होने का हक दिलाया है। देश में माहौल बिगाड़ने वाले नेताओं को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। लखीमपुर खीरी की घटना से पूरा देश चिंताग्रस्त है। कांग्रेस को मतदाताओं का दिल जीतने के लिए उनके हितों की बात करनी होगी।
’कांतिलाल मांडोत, सूरत

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