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चौपाल : सपनों की सरकार

आज के बदलते दौर में जनता को ऐसी सरकार की दरकार होती है, जो न केवल विकास को प्राथमिकता दे, बल्कि देश को भी मजबूती दे। कोई भी सरकार सत्ता की प्राप्ति के बाद उन्माद और अहंकार का प्रदर्शन न करे। सरकार या सरकार में बैठे लोग सरकारी संपत्ति का प्रयोग अपने शौक पूरे करने या पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाने जैसी व्यर्थ के कार्यों पर न करे।

Author Updated: November 11, 2020 5:47 AM

आज के बदलते दौर में जनता को ऐसी सरकार की दरकार होती है, जो न केवल विकास को प्राथमिकता दे, बल्कि देश को भी मजबूती दे। कोई भी सरकार सत्ता की प्राप्ति के बाद उन्माद और अहंकार का प्रदर्शन न करे। सरकार या सरकार में बैठे लोग सरकारी संपत्ति का प्रयोग अपने शौक पूरे करने या पार्टी की लोकप्रियता बढ़ाने जैसी व्यर्थ के कार्यों पर न करे।

सरकार जहां तक संभव हो, राजनीति को अपराधियों की पहुंच से दूर रखे। राजनीति को स्वच्छ तथा भाई-भतीजावाद से दूर रखे। सरकार राज्य-राष्ट्र को मजबूत नेतृत्व दे, जो जनहित में बड़े सरोकारी फैसले ले सके। सबसे महत्त्वपूर्ण यह कि सरकार युवाओं को सुरक्षित रोजगार दे सके, ताकि देश की एक बड़ी युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान कर सके। एक लोककल्याणकारी राज्य में ये बातें पूरी तरह व्यावहारिक हैं और ऐसा करने से ही सरकार जन अपेक्षाओं पर खरी उतर सकती है और लोकतंत्र का उद्देश्य सफल हो सकता है।
’महेंद्रनाथ चौरसिया, सिद्धार्थनगर, उप्र

अमेरिका से उम्मीद

आखिरकार विश्व शक्ति अमेरिका का राष्ट्रपति पद जो बाइडेन को मिल गया। बाइडेन वास्तव में कुशल राजनीतिक और विदेश नीति के अच्छे जानकार माने जाते हैं। विश्व शक्ति से भारत को भी सकारात्मक उम्मीद है, जिसका जिक्र चुनावी समर में भी देखने को मिला। बाइडेन बहुपक्षीय दृष्टिकोण के विचारक और राजनीतिक माने जाते हैं, जो उनके सामरिक व्यक्तित्व को दृष्टिगोचर होती है।

भारत अमेरिका से व्यापक उम्मीदें रखता है, चाहे अमेरिकी क्षेत्रीय सहयोग संगठन जी- 7 और जी- 20 में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो, आंतकवाद की समस्या का स्थायी समाधान हो और दक्षिणी एशियाई देशों में शांति एवं समृद्धि का नया सूर्योदय निश्चित रूप से साकार हो सकता है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि बाइडेन विदेश नीति की कुशल व्यवस्था प्रबंधन से भारत-अमेरिका के रिश्तों को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से मजबूती दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे ताकि भारत की सभी मुरादें जल्द से जल्द पूरी हो सके।
’महेश आचार्य, नागौर, राजस्थान

सोने से डर

अब क्या कर सकते हैं! सोना बहुत महंगा हो गया है और अब सोने से भी डर लगने लगा है। इसके असर को सोच कर नींद उड़ गई है।
’प्रकाश हेमावत, टाटा नगर, रतलाम, मप्र

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