ताज़ा खबर
 

चौपालः शिक्षा की उपेक्षा

आजादी के सात दशक बाद भी शिक्षा के प्रति हमारी सोच कामचलाऊ ही चल रही है। इसका परिणाम हुआ कि अभी तक हमारे देश में लगभग 33 लाख लोग शिक्षित नहीं हैं यानी सही मायने में साक्षर नहीं हैं।

Author August 20, 2018 5:29 AM
जिन्हें महज अपना नाम लिखना आ जाता है सरकार उन्हें भी अपने साक्षरता के रजिस्टर में दर्ज तक लेती है।

आजादी के सात दशक बाद भी शिक्षा के प्रति हमारी सोच कामचलाऊ ही चल रही है। इसका परिणाम हुआ कि अभी तक हमारे देश में लगभग 33 लाख लोग शिक्षित नहीं हैं यानी सही मायने में साक्षर नहीं हैं। अर्थात 33 लाख लोगों को अपना नाम तक लिखना नहीं आता। जिन्हें महज अपना नाम लिखना आ जाता है सरकार उन्हें भी अपने साक्षरता के रजिस्टर में दर्ज तक लेती है। इस हिसाब से हमारे देश में साक्षरता 74 प्रतिशत तक पहुंच सकी है लेकिन निरक्षरता में कमी जनसंख्या में वृद्धि के अनुपात में नहीं हो पाई है। 2001 से 2011 तक के बीच सात वर्ष की आयु के ऊपर की जनसंख्या में 18 करोड़ 65 लाख का इजाफा हुआ है मगर निरक्षरता में कमी सिर्फ सिर्फ 3 करोड़ 11 लाख ही दर्ज हुई।

अगर हम शिक्षा के अधिकार कानून की बात करें तो यह 2010 में पास हुआ था और इसके अनुसार 6 से 14 वर्ष आयु के बीच के सभी बच्चों को अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। पर हम ऐसा करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। हों भी कैसे! अधिकतर विद्यालयों में न तो बिजली की व्यवस्था है न शौचालयों की। एक खबर के मुताबिक 11 हजार प्राथमिक स्कूल पूरी तरह से जर्जर हैं और 11 लाख 40 हजार स्कूलों की और 6 लाख 98 हजार कक्षाओं की मरम्मत कराने की जरूरत है। माना कि बच्चे विद्यालय के जर्जर रहने की स्थिति में बाहर मैदान में पढ़ लेंगे लेकिन बाहर पढ़ाने के लिए भी तो कोई चाहिए! अधिकतर प्राथमिक विद्यालयों में केवल दो से तीन शिक्षकों की नियुक्ति की गई है और उन्हें पढ़ाना होता है पांच कक्षाओं को।

इन्हीं तमाम समस्याओं के कारण गांवों में 1000 में से 326 और शहरों में 1000 में से 383 बच्चे स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हैं। इसी कारण साक्षरता और शिक्षा के मामले में भारत की गिनती दुनिया के पिछड़े देशों में होती है। अगर भारत की तुलना आसपास के देशों से करें तो हम चीन, श्रीलंका, म्यांमा, ईरान से भी पीछे हैं। लिहाजा, अब समय आ गया है कि सरकार अपनी शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करे और उसे नए सिरे से तराशे।

अनुराग कुमार, इलाहाबाद विश्वविद्यालय

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X