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चौपालः आरक्षण कब

देश में भले ही हर तरफ महिलाओं को आगे लाने, उन्हें प्राथमिकता देने की बात होती हो लेकिन जब उनके अधिकारों पर कानूनी मोहर लगाने बारी आती है तो संसद व विधानमंडलों में उन्हें 33 फीसद आरक्षण देकर राजनीतिक दल अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहते।

Author August 23, 2018 1:58 AM
2018 में महिला आरक्षण बिल पर फिर से चिट्ठी-पत्री का खेल चल रहा है, पर सियासी दल और सरकार रहस्यमय खामोशी की चादर ओढ़े हुए हैं।

आरक्षण कब

देश में भले ही हर तरफ महिलाओं को आगे लाने, उन्हें प्राथमिकता देने की बात होती हो लेकिन जब उनके अधिकारों पर कानूनी मोहर लगाने बारी आती है तो संसद व विधानमंडलों में उन्हें 33 फीसद आरक्षण देकर राजनीतिक दल अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहते। भारत जैसे पुरुष प्रधान समाज में घर हो या दफ्तर, सड़क हो या संसद, महिलाओं के लिए जगह कम करने में लोगों को कैसी हैरानी? अफसोस जरूर होता है यह देख कर कि महिलाओं के विकास से ही घर-परिवार, समाज और देश का विकास संभव है- ये नारे आखिरकार इतने लंबे समय से कैसे चल पा रहे हैं! इन्हीं नारों को सुन कर लोग रैलियों और जनसभाओं में तालियां भी बजा रहे हैं। राजनेताओं को वोट भी पड़ रहे हैं, सरकारें आ भी रही हैं और जा भी रही हैं पर महिलाओं के हित में सरकारों की तरफ से कोई कदम नदारद है।

सोचिए, अगर इसकी शुरुआत संसद से होती तो यह देश और समाज के लिए कितना बड़ा संदेश होता? महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ी राह खुलती। महिलाओं के प्रति समाज के मर्दवादी रवैए और उनके खिलाफ अपराधों का ग्राफ नीचे गिरता। जब विधायिका ही उदासीन है, तो फिर हालात कैसे बदलेंगे? 1996 में एचडी देवेगौड़ा के प्रधानमंत्री काल में पहली बार महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया था। 2018 में महिला आरक्षण बिल पर फिर से चिट्ठी-पत्री का खेल चल रहा है, पर सियासी दल और सरकार रहस्यमय खामोशी की चादर ओढ़े हुए हैं।

रोहित यादव, एमडी यूनिवर्सिटी, रोहतक

प्रेरणा पुरुष

अटल बिहारी वाजपेयी देश के कद्दावर नेता थे लेकिन उनमें अहंकार नाम मात्र का नहीं था। उन्होंने सादगी से भरा जीवन जिया। भले ही वे एक राजनीतिक दल से जुड़े हुए थे, लेकिन उनके व्यक्तित्व में गांधीजी का प्रभाव देखने को मिलता था। सचमुच में जियो और जीने दो के सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने मानवीय संवेदनाओं को कायम रखा। हमें उनके सादगी और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर देश हित में काम करना चाहिए। राजनीति में संत जैसा जीवन जीने वाले इस महान कर्मयोगी को नमन।

हेमा हरि उपाध्याय, जावरा रोड, उज्जैन

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