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चुनाव की खातिर

उत्तराखंड सरकार ने कावड़ यात्रा रद्द करने का फैसला कर उचित ही किया है।

सांकेतिक फोटो।

उत्तराखंड सरकार ने कावड़ यात्रा रद्द करने का फैसला कर उचित ही किया है। सरकार ने पिछली गलती से सबक लेते हुए यह कदम उठाया है। अगर हरिद्वार में कुंभ का आयोजन भी इसी तरह टाल दिया जाता तो राज्य कोरोना की मार से बच जाता। जब संक्रमण तेजी से फैलने लगा तो बीच में कुंभ को खत्म कराया गया। इस समय तीसरी लहर का खतरा सामने है। डेल्टा प्लस विषाणु ने भी देश में दस्तक दे दी है।

ऐसे में कांवड़ यात्रा कराना लोगों को मौत के मुंह में डालने जैसा होता। सुप्रीम कोर्ट ने भी कांवड़ यात्राओं को जोखिमपूर्ण बताया है क्योंकि कांवड़ यात्रा और शिव मंदिरों में जल चढ़ाने के लिए लाखों लोगों की भीड़ संक्रमण फैलाएगी। लेकिन समझ नहीं आ रहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों को इतनी बात समझ में क्यों नहीं आ रही। विवेकशील सरकार वह होती है जो समय के अनुरूप और जनता के हित में फैसले ले। जो राज्य अभी भी कांवड़ यात्रा रद्द करने से हिचकिचा कर रहे हैं वे असल में अपने चुनावी हित देख रहे हैं। उन्हें जनता की जान की परवाह नहीं है। अभी तो यह सोचा ही नहीं जाना चाहिए कि भीड़ वाले आय.जनों को इजाजत दी जाए। एक तरफ प्रधानमंत्री रोजाना भीड़ से बचने की अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा शासित राज्य ही अपने चुनावी हितों को देखते हुए लोगों की जान जोखिम में डालने में तुले हैं।
’बीएल शर्मा”अकिंचन”, तराना (उज्जैन)

जहरीली शराब से मौतें

सरकार तो हर जगह निगरानी कर नहीं सकती। गांव, शहर, महानगर, जिला आदि की सारी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होती है और संबंधित प्रशासनिक महकमों की। अवैध शराब बनने और बिकने से रोकने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी होती है। फिर भी लोग जहरीली शराब के शिकार होते रहते हैं। कभी मध्यप्रदेश तो कभी उत्तर प्रदेश तो कभी बिहार या दूसरे राज्यों में ऐसी घटनाएं अक्सर ही सामने आती रहती हैं। हाल में बिहार के एक गांव में जहरीली शराब से बारह लोगों की मौत हो गई।

प्रशासन चुप रहा। लेकिन विधायक के पहुंचने पर गांव वालों के मुंह भी खुले और प्रशासन हरकत में आया। सवाल है कि क्या हर वक्त घटना के घटने पर विधायक या सांसद को ही पहुंचना पड़ेगा और तभी स्थानीय प्रशासन हरकत में आएगा? आखिर समय पर हमारा पुलिस विभाग और स्थानीय प्रशासन क्यों नहीं जागता? आखिर वे क्यों नहीं अपनी जवाबदारी बराबर निभाते हैं? सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए। आखिर कहां और किसकी चूक से लोग मरते हैं? जिस महकमे मके कारण ऐसी गंभीर और लापरवाही भरी घटनाएं होती हैं, उस पर सख्त कार्रवाई की जानी जरूरी है।
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

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