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चौपालः मेहनत का फल

कैडर, कार्यकर्ता और विचारधारा- इन तीनों को लेकर कोई राजनीतिक दल या संगठन बनता है।

नरेंद्र मोदी (PTI Photo)

कैडर, कार्यकर्ता और विचारधारा- इन तीनों को लेकर कोई राजनीतिक दल या संगठन बनता है। कोई भी इसके खिलाफ या समर्थन में हो सकता है, मगर अहम बात बस यही है कि कौन-सा दल अपनी विचारधारा पर टिका रहता है और उसके साथ उसका कैडर भी रहता है। भारतीय सियासत में माकपा, कांग्रेस, बसपा और भाजपा मुख्य रूप से जमीनी स्तर की पार्टियां हैं, लेकिन कांग्रेस और बसपा ने अपनी जमीन खुद खो दी। इन्होंने सत्ता के नशे में चूर होकर अपने कैडर को कमजोर करते हुए सिर्फ सत्ता का मजा लूटा और जमीनी स्तर पर खुद को मजबूत कतई नहीं किया।

वहीं दूसरी तरफ माकपा और भाजपा ने खुद को जमीनी तौर पर मजबूत किया और पूरी ईमानदारी से अपनी विचारधारा व सिद्धांतों पर टिकी रहीं। लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी शायद भूल गई कि जिस ‘सर्वहारा’ सिद्धांत पर वह काम कर रही है वे सर्वहारा भी तो इंसान ही हैं। आखिर कैसे वे अपने ऊपर बंगाल में हुए जुल्म भूल जाते, कैसे अपनी छीनी हुई जमीन को भूल जाते? इसका हश्र यह हुआ कि आज कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता के अर्श से फर्श पर है। दूसरी तरफ भाजपा की बात करें तो वह ज्यों की त्यों अपनी विचारधारा पर खड़ी है, अपने सिद्धांत को आगे बढ़ा रही है। आप इसे गलत या सही कहिये, बुरा कहिये मगर पूरी भाजपा और उसकी विचारधारा, उसका कैडर ऐसा का ऐसा ही खड़ा है, हार हो या जीत हो, बुरा हो या भला हो, चाहे कितनी लानतें क्यों न मिली हों।

आज उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में प्रचंड बहुमत और देश की 58 प्रतिशत सरकारों पर उसका कब्जा होना इसी अडिगता, कर्तव्यनिष्ठा का नतीजा है। वैचारिक मतभेद अपनी जगह लेकिन भाजपा को जो मिला उसकी मेहनत का फल है।
’असद शैख, दिल्ली विश्वविद्यालय

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