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मानवता के लिए

कोरोना संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा चीन-ताइवान जैसी विकट स्थितियों के बीच जी-20 सम्मेलन का व्यवस्थित ढंग से संपन्न होना राहत की बात है!

मानवता के लिए
जी20 सम्मेलन में पीएम मोदी (फोटो- एएनआई)

भारत अब जी-20 का अध्यक्ष बन गया है! सम्मेलन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर के सिद्धांत पर उन्होंने दो टूक शब्दों में हर राष्ट्र को संदेश दिया।

इस सम्मेलन में चीनी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के लिए बिना एक-दूसरे को गिराए संपन्न होने के लिए यह धरती पर्याप्त है। मतलब यह कि दोनों मिल बैठ कर इस दुनिया को लूट लें! मगर वे भूल गए हैं कि जब ऊंट पहाड़ के नीचे आता है तो उसे अपनी ऊंचाई का छोटापन नजर आता है। परमाणु अस्त्रों के इस युग में अब कोई राष्ट्र छोटा या बड़ा नहीं है, क्योंकि कुछ ही परमाणु बम पूरी धरती को बर्बाद करने के लिए पर्याप्त हैं।

अब जरूरत है कि युद्ध के लिए होने वाले खर्च को मानव विकास में खर्च किया जाए। भारत के हाथों में जी-20 की अध्यक्षता है! इसका भरपूर उपयोग कर भारत और विश्व के लिए काम करने का बेहतरीन अवसर प्राप्त हुआ है, जिसका भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए।
सुभाष बुड़ावनवाला, रतलाम, मप्र

प्रगाढ़ होते संबंध

पिछले दिनों भारतीय प्रधानमंत्री और ब्रिटेन के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के बीच भारत ब्रिटेन के संबंधों को लेकर एक लंबी बातचीत हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई थी। लगता है कि अब उसका असर दिखने लगा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने तीन हजार भारतीय नागरिकों को वीजा देने की बात कही है।

इसके तहत अब अठारह से तीस वर्षीय डिग्रीधारी शिक्षित भारतीयों को ब्रिटेन में आकर रहने और दो वर्ष तक काम करने की अनुमति रहेगी। आज हम यह विश्वास कर सकते हैं कि अब आगे भारत और ब्रिटेन के संबंध और प्रगाढ़ होने की संभावनाएं हैं। इसे मुक्त व्यापार समझौता अधिनियम के अंतर्गत भी देखा जा सकता है, जो कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और समाज को समृद्ध बनाने के लिए मददगार सिद्ध होगी। यह बेहद खुशी की बात है कि ब्रिटेन में एक भारतीय मूल का नागरिक वहां का प्रधानमंत्री बन गया है, जो कि भारतीयों के लिए और हमारी अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने और उसे और भी अधिक समृद्ध बनाने के लिए सहयोगी सिद्ध हो रहा है, जिसका असर अब दिखने भी लगा है।

यह बात भी समझने की है कि आज दोनों देशों को एक-दूसरे के सहयोग की काफी आवश्यकता है, क्योंकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में भी अभी कुछ परेशानियां चल रही हैं। अगर उसको भारत का सहयोग मिलता रहेगा तो यह उसके लिए भी ठीक होगा। आज के समय में दोनों देशों के बीच में आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध और अधिक प्रगाढ़ होते हैं तो इसका लाभ न केवल भारत में रहने वालों, बल्कि ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुस्तानियों को भी इसका फायदा मिलेगा।

इसलिए यहां दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों का एक पुल भी अवश्य बनेगा, जो दोनों जगह के हिंदुस्तानियों को अपने सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से अपने देश की मिट्टी से जुड़ेगा और उसकी सुगंध से भी परिचित कर आएगा।
मनमोहन राजावत राज, शाजापुर

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First published on: 18-11-2022 at 02:48:58 am
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