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सौहार्द की विरासत

सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम से जो जातिवादी संघर्ष शुरू हुआ, उसने करोड़ों हृदयों को दुखी किया है।

Author Published on: May 25, 2017 5:52 AM
Saharanpur Violence, Saharanpur Riots, Bhim Army, Bheem Army, ChandraShekhar Azad Bhim Army, AISa, Jantar mantar, Communal Violence, Communal Riots, Hindi Newsजंतर मंतर पर प्रदर्शन करते सहारनपुर से आए दलित समाज के लोग। (Source: PTI)

सौहार्द की विरासत
सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम से जो जातिवादी संघर्ष शुरू हुआ, उसने करोड़ों हृदयों को दुखी किया है। महाराणा प्रताप के पितामह राणा सांगा (संग्राम सिंह), उनकी पत्नी रानी रत्नकुवरी झाली और पुत्रवधू मीराबाई संत शिरोमणि रविदास के शिष्य थे। उनके आग्रह पर संतजी के जीवन के अंतिम बारह वर्ष चित्तौड़गढ़ के किले में बीते। वहीं उन्होंने अपना शरीर त्यागा। ‘रविदास की छतरी’ नाम से उनकी समाधि चित्तौड़ दुर्ग में ही है। मीरा के कुंभ श्याम मंदिर के परिसर में ही वह स्थित है। महाराणा प्रताप भी उस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते थे। आज इन दोनों तेजस्वी महापुरुषों के वंशज-अनुयायी एक दूसरे पर हमला करें- इससे बढ़ कर संतापकारी बात क्या हो सकती है! रविदासजी ने कहा है- ‘रविदास न जाति पूछिए, अरे का जाति अरु पाती / ब्राह्मण-खत्री-वैस-सूद्र, सबह इक ही जाति।’
संपूर्ण हिंदू समाज को एक जाति मानने वाले हमारे महापुरुषों की आत्माओं को इस आपसी लड़ाई से मर्मांतक कष्ट हो रहा होगा। तत्काल रोकिये इसे।
’अजय मित्तल, मेरठ
किसलिए जश्न
केंद्र सरकार जिस तरह अपने कार्यकाल की तीसरी वर्षगांठ मना रही है उससे कुछ सवाल भी खड़े होते हैं। मसलन, आखिर इन तीन सालों में सरकार ने जनता के हित में क्या काम किया है? नोटबंदी के दौरान जनता ने इस उम्मीद में परेशानी झेली कि आगे इसका फायदा होगा। लेकिन वह फायदा कहीं दिख नहीं रहा है। महंगाई में भी कोई कमी नहीं आ रही है। विदेशों से काला धन वापस लाने के मोर्चे पर सरकार फेल हुई है। अगर आंतरिक सुरक्षा की बात की जाए तो देश में कई आतंकवादी घटनाओं ने सरकार की विफलता को उजागर किया है। रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार बिल्कुल फिसड््डी साबित हो रही है।
ऐसे में सरकार को जश्न मनाने के बजाए कोशिश करनी चाहिए कि आने वाले दिनों में महंगाई, सुरक्षा, बेरोजगारी जैसे मुददों पर ध्यान केंद्रित कर तमाम समस्याओं का समाधान करे, वरना यह जनता है, सब कुछ जानती है।
’हिफजुर रहमान रिंकु, बैदा शेरघाटी, गया

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