फर्जी खबरों का संजाल

सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी खबरों पर जो गंभीर टिप्पणी की है, वह वर्तमान में फेक न्यूज के बढ़ते दायरे को लेकर न्यायपालिका की चिंता को बताती है।

सांकेतिक फोटो।

सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी खबरों पर जो गंभीर टिप्पणी की है, वह वर्तमान में फेक न्यूज के बढ़ते दायरे को लेकर न्यायपालिका की चिंता को बताती है। यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि जो काम कार्यपालिका को करना चाहिए, वह न्यायपालिका को करना पड़ रहा है। सच्चाई तो यह है कि सोशल मीडिया का चलन जिस तेजी से बढ़ा, उसी के साथ इस पर फर्जी खबरों की बीमारी भी बढ़ती गई। लेकिन इतनी ही तेज गति से इसे रोकने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। जब पानी सर से गुजरना लगा और सरकार को अपना नुकसान समझ आने लगा, तब जाकर उसकी नींद टूटी। बल्कि हकीकत तो यह है कि सरकार तो खुद सोशल मीडिया और इसकी फर्जी खबरों का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने में ही लगी रही। नतीजतन समय-समय पर भीड़ हिंसा की घटनाएं और दंगों के रूप में इसके घातक परिणाम सामने आते रहे।

आजकल हम देख रहें हैं कि गंभीर मुद्दों पर तेजी से फर्जी वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं जो आम लोगों को भ्रमित ही नहीं करते, बल्कि उनका नुकसान भी करते हैं। इसलिए अच्छा हो कि न्यायपालिका की पहल के बाद ही सही, सरकार की नींद तो खुले और वह इस पर कोई कठोर कानून लेकर आए ताकि फर्जी खबरें चलाने वाले, इनके स्रोत और अफवाहें फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई की जा सके।
’सुमित यादव, कालपी (उप्र)

विधायक की हरकत

हाल में बिहार के एक विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल, पटना-दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस के ए-1 कोच में सफर के दौरान ‘कच्छा-बनियान’ पहने घूमते रहे। जब दूसरे यात्रियों ने उनकी इस अनुचित हरकत का विरोध किया तो वे धमकी और गाली-गलौच करते देते हुए बोले- ‘आप जानते नहीं मैं कौन हूं’। जब यात्रियों ने इसकी शिकायत रेलवे पुलिस से की तो पुलिस भी उनका कुछ नहीं कर पाई। विधायक जी हरकत और ताकत के आगे पुलिस की ताकत कमजोर पड़ गई। इस मामले में बिहार सरकार और दिस पार्टी के विधायक हैं, उस पार्टी को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ पुलिस प्रशासन को भी अपनी कानूनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए। वरना ऐसा करने वालों का मनोबल बढ़ेगा और जनता निराश होकर देखती रहेगी।
’महेश नेनावा, इंदौर

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