क्रूरता की हद

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे की कार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया, जिससे चार किसान और चार अन्य लोग मारे गए।

लखीमपुर खिरी में किसाानआंदोलन के दौरान हुई हिंसा। फाइल फोटो।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे की कार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया, जिससे चार किसान और चार अन्य लोग मारे गए। यह भाजपा का कैसा रामराज्य है, जहां अपराधियों, तस्करों और देश के पैसे लेकर भागने वालों को संरक्षण और अन्नदाता को सरेआम सड़कों पर कुचल दिया जाता है। ऐसी कू्ररता न अंग्रेजों की शासन में थी, न मुगल काल में। इस पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मुंह से आह तक नहीं निकली। जनता सबका हिसाब-किताब करना जानती है। इस घटना से भाजपा को भारी नुकसान होगा।

लखीमपुर खीरी में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कार्यक्रम था। उससे पहले बड़ा बवाल हो गया। तिकुनिया में काले झंडे दिखाने के लिए खड़े किसानों की भाजपा नेताओं से झड़प हो गई। आरोप है कि उसी दौरान प्रदर्शन कर रहे किसानों पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे ने गाड़ी चढ़ा दी। जिसमें चार किसानों ने दम तोड़ दिया और कई घायल हो गए। हादसे के बाद आक्रोशित किसानों ने गाड़ियों में आग लगा दी। दरअसल, केशव प्रसाद मौर्य को लखीमपुर खीरी में कुछ परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करना था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के पैतृक गांव बनबीरपुर भी जाना था। डिप्टी सीएम के कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर किसान नेता काले झंडे दिखाने के लिए इकट्ठा हुए थे। हालांकि केशव प्रसाद मौर्य वहां नहीं गए।

इस तरह किसानों का आंदोलन रुकने वाला नहीं है। ये किसी राजनीति दल के भाड़े के टट्टू नहीं हैं। ये लड़ना भी जानते हैं और मरना भी।
’प्रसिद्ध यादव, बाबुचक, पटना

लोकतंत्र में विपक्ष

केंद्र में भाजपा की सरकार के आने के बाद विपक्षी एकता के प्रयास होते रहे हैं, मगर नेताओं के निजी स्वार्थ के टकराव में बात अपेक्षानुरूप नहीं बनी, बल्कि विपक्षियों में टूटन और मतभेद गहराते गए। विपक्षी दल चाहते भी हैं कि विपक्ष में टकराव बंद हो और एकजुटता भी बनी रहे। सभी धड़े मजबूती से हाथ थामने को तैयार नहीं होते और समय आने पर साथ छोड़ देते हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस बड़े जनाधार वाली पार्टी है, मगर दिक्कत है कि कांग्रेस को कांंग्रेसी ही कमजोर करने से बाज नहीं आ रहे और विपक्षी दल भी इस ताबूत में कीलें ठोक रहे हैं।

देश की बाह्य और आंतरिक समस्याओं को विपक्ष ठीक से समझे और सत्ता के सपनों से हट कर मुद्दों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करे, तो सत्ता से दूर या बाहर रह कर भी शक्ति में वृद्धि और छवि को निखार सकता है। जन और दल का विश्वास जीतने के लिए कांग्रेस में जबर्दस्त अनुशासन और आलाकमान में भी बड़े पैमाने पर बदलाव की दरकार है, क्योंकि स्वस्थ लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष रूपी आक्सीजन की देश को जरूरत है।
’बीएल शर्मा ‘अकिंचन’, तराना, उज्जैन

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