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चौपालः सेवाक्षेत्र का विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था तीन क्षेत्रों में विभाजित है। पहला है प्राथमिक क्षेत्र, जिसमें कच्चे माल का उत्पादन अर्थव्यवस्था को आकार देता है, दूसरा है विनिर्माण और तीसरा है सेवा क्षेत्र।

Author August 6, 2018 3:25 AM
यदि सरकार वाकई किसानों का हित चाहती है तो एक तीर से दो लक्ष्य साधने वाले उपायों पर विचार करना चाहिए जो ग्रामीण विकास और अर्थव्यवस्था को धार देने वाले मुश्किल खेल में तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं।

सेवाक्षेत्र का विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था तीन क्षेत्रों में विभाजित है। पहला है प्राथमिक क्षेत्र, जिसमें कच्चे माल का उत्पादन अर्थव्यवस्था को आकार देता है, दूसरा है विनिर्माण और तीसरा है सेवा क्षेत्र। सेवा क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में अहम योगदान है। बावजूद इसके सरकार देश में गांवों की गरीबी मिटाने के लिए प्रमुख ग्रामीण व्यवसाय कृषि की उत्पादकता बढ़ाने पर निरंतर जोर दे रही है। इसमें दो राय नहीं कि सरकार के सराहनीय प्रयासों और तकनीकी के विकास से कृषि पैदावार बढ़ी है। लेकिन इस बढ़ी हुई उत्पादकता ने किसानों की मुश्किलें भी बढ़ाई हैं। नतीजतन, अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कृषि क्षेत्र में पैदावार बढ़ने पर उनके दामों में गिरावट देखने को मिलती है। इसका खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। यह किसानों की आय न बढ़ने की बड़ी वजह है।

यदि सरकार वाकई किसानों का हित चाहती है तो एक तीर से दो लक्ष्य साधने वाले उपायों पर विचार करना चाहिए जो ग्रामीण विकास और अर्थव्यवस्था को धार देने वाले मुश्किल खेल में तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं। जब अमेरिका और चीन जैसे दिग्गज देश सेवा क्षेत्र के बल पर गरीबी को दरकिनार कर अर्थव्यवस्था को आकार दे सकते हैं तो भारत क्यों नहीं? वैसे भी भारत के गांवों में श्रम और पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। बस जरूरत है तो उन्हें उभारने की। इसमें सरकार के साथ मीडिया और फिल्मोद्योग भी अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। लेकिन दुख इस बात का है कि मीडिया और फिल्मोद्योग ने आज तक गांव को केवल गरीबी के नजरिये से पेश किया गया है। शहरी युवाओं की तुलना में ग्रामीण युवाओं के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण है, शहर और गांव के बीच संसाधनों की उपलब्धता का अंतर। आज भी न तो गांव में इंटरनेट की उचित व्यवस्था है और न ही तकनीकी प्रशिक्षण की। जब तक गांवों को शहरों के समान सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी तब तक न ग्रामीण युवाओं के कौशल और गांव के प्राकृतिक सौंदर्य का समुचित उपयोग किया जा सकता है, न ही गांवों का विकास।

पिंटू सक्सेना, लखनऊ

ताज की सुध

मुहब्बत की निशानी कहे जाने वाले ताजमहल के संरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्यितार किया है। उसने ताज के संरक्षण और रखरखाव के प्रति सरकारी उदासीनता पर कहा कि अगर इसे संभाल नहीं सकते हैं तो ढहा दीजिए! कुछ समय से ताज की चमक फीकी पड़ती जा रही है जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार सख्ती दिखा रहा है। उधर पर्यटन विभाग को ताज बचाने और पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाने से ज्यादा इसे बिगाड़ने की चिंता है। तभी तो सरकार और पर्यटन विभाग ने ताजमहल के आसपास उद्योग लगाने की अर्जियां ले ली हैं। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में उद्योग लगाने के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं और उनके आवेदन पर विचार भी हो रहा है।

ताजमहल से जुड़े करीब दस हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को मिलाकर ताज ट्रेपेजियम जोन बनाया गया है। इसमें आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस, एटा और भरतपुर जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में हालांकि तमाम ऐसी बंदिशें लगाई गई हैं, जिनसे प्रदूषण का स्तर नियंत्रित रहे और ताजमहल को नुकसान न पहुंच लेकिन अधिकारियों के दावे कागजी ही रहे हैं। एक तरफ ग्रीन जोन बढ़ने के दावे हैं, दूसरी ओर मई की रिपोर्ट में आगरा प्रदूषित शहरों में दुनिया में आठवें नंबर पर था। जो उद्योग पहले से ताजमहल को नुकसान पहुंचा रहे हैं उन्हें तुरंत बंद कराया जाना चाहिए। यूनेस्को दार्जिलिंग रेलवे स्टेशन को अपनी ‘हेरिटेज जोन’ की सूची से हटाने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में अगर ताजमहल को इस सूची से हटा दिया गया तो यह काफी शर्मिंदगी भरा होगा।

संतोष कुमार, बठिंडा

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