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चौपाल: अनुभव की पाठशाला

अक्सर आवेदक रोजगार पाने की मैराथन दौड़ में शामिल तो हो जाते हैं, लेकिन अनुभव की मांग से मैराथन में दौड़ते-दौड़ते पैर लड़खड़ाते नजर आते हैं।

government jobs reservation rajasthan ashok gehlotराजस्थान में बढ़ती बेरोजगारी ने राज्य सरकार की चिंता काफी बढ़ा दी है। (फाइल फोटो)

शासकीय-अशासकीय उपक्रमों, कंपनियों में और भर्ती अभियान में आवेदकों से शिक्षा के साथ-साथ कार्य अनुभव की मांग की जाती है। नीतियों के अंतर्गत कुछ हद तक ठीक है कि नियुक्त कर्मचारी उस काम को सुचारु रूप से क्रियान्वित कर सके। लेकिन यह भी सच है कि बगैर कहीं नियुक्ति के अनुभव मिलना मुश्किल है। बेरोजगारी का दर्द वही शिक्षित बेरोजगार जानते हैं, जो भुक्तभोगी हैं। रोजगार मिलता ही नहीं तो अनुभव कहां से और कैसे प्राप्त किया जाए?

अक्सर आवेदक रोजगार पाने की मैराथन दौड़ में शामिल तो हो जाते हैं, लेकिन अनुभव की मांग से मैराथन में दौड़ते-दौड़ते पैर लड़खड़ाते नजर आते हैं। वर्तमान दौर में कहीं-कहीं कार्यशाला और प्रशिक्षण होते भी हैं। लेकिन इनकी भी अधिकता होनी चाहिए। आवेदकों की योग्यता का आकलन जरूर करें, लेकिन उसे समय रहते रोजगार दें। नियुक्ति के पश्चात प्रशिक्षण और कार्यशाला, आयोजित करे।

अच्छे अनुभव को प्राप्त कर आवेदक किसी भी उपक्रम, कंपनियों को शिखर तक ले जा सकता है। वैसे नियुक्ति के बाद शासन के विभागों में प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था पूर्व में बनी हुई है। निजी कंपनियों को भी अनुभव की पाठशाला नियुक्तियों के पूर्व लगानी होगी। तभी रोजगार पाने वाले युवावर्ग का सपना साकार हो सकेगा और उसे दो जून की रोटी नसीब हो सकेगी!
’योगेश जोशी, बड़वाह, मप्र

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