ताज़ा खबर
 

चौपाल: चीन का विस्तारवाद

चीन की कूटनीतिक सफलता इस आधार पर भी देखी जा रही है कि वह अपनी डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी माध्यम से पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, तुर्की आदि देशों के संसाधनों तक अपनी पहुंच बनाने में सफल होता दिख रहा है।

india china tension, galwan valley, ladakh, indian army pangong tsoभारत चीन सीमा पर अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है।

गतिशील वैश्विक परिदृश्य में चीन के दक्षिण एशिया में विस्तारवादी आर्थिक कूटनीति अपने चरम पर है। इस विषय को इस प्रकार समझा जा सकता है कि शीत युद्ध के दौरान विचारधारात्मक संघर्ष के कारण यूरोप का अधिकांश भाग आर्थिक रूप से पस्त हो गया था और इससे भविष्य में अकाल जैसी चुनौती का सामना करना पड़ सकता था। यूरोप की इसी स्थिति का फायदा अमेरिका ने उठाते हुए ‘मार्शल प्लान’ की शुरुआत की और इस क्षेत्र की संभावनाओं को आर्थिक सुधार कार्यक्रम द्वारा बदल दिया था, जिसके द्वारा पश्चिमी यूरोप में अरबों डॉलर का निवेश किया गया।

यूरोप में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधार को प्रेरित करने के लिए तैयार किए गए एक कार्यक्रम के साथ-साथ, मार्शल प्लान ने आर्थिक सुधार के साथ ही अमेरिकी आधिपत्य को स्थापित कर दिया था। यह ध्यान देने योग्य बात है कि चीन का बीआरआइ योजना कहीं एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशों के लिए मार्शल प्लान के समान ही तो नहीं है? दरअसल, जिस प्रकार चीन द्वारा इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है, वह इसी और संकेत करता है। चीन विकास को बढ़ावा देने के बजाय बीआरआइ के माध्यम से गरीब देशों को ऋण दे रहा है। वह अपनी चेकबुक डिप्लोमेसी के अनुसार अग्रसर है।

अमेरिका के बढ़ते संरक्षणवाद के समय यह बात भी जरूरी है कि बेल्ट एंड रोड परियोजन को दुनिया भर में चीन द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश कार्यक्रम के रूप में आर्थिक विकास और भू राजनीतिक संबंधों का विस्तार करने के लिए तैयार किया गया है। चीन की कूटनीतिक सफलता इस आधार पर भी देखी जा रही है कि वह अपनी डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी माध्यम से पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, तुर्की आदि देशों के संसाधनों तक अपनी पहुंच बनाने में सफल होता दिख रहा है। भारत के लिए चिंता विषय यह है कि अगर चीन अपनी इस मंशा में कामयाब होता है तो भारत के पड़ोसी देशों के संसाधनों तक चीन की पहुंच हो जाएगी। उसके बाद हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन का वर्चस्व हो जाएगा।

हाल ही में हुए मालाबार युद्धाभ्यास के लिए भारत ने अमेरिका और जापान के साथ आॅस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित करने का प्रस्ताव रखा था। जिसे एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा सकता है। इन सभी में ‘क्वाड’ की भूमिका निश्चित रूप से महत्त्वपूर्ण होगी। चीन के बढ़ते ‘मार्शल प्लान’ को प्रतिसंतुलित करने के लिए भारत ‘नेबरहुड नीति’ पर फिर से विचार करना होगा, क्योंकि जिस प्रकार से पड़ोसी देश (नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका) चीन के पाले में जा रहे हैं, वह इस नीति को और भी प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर देते है ,साथ ही साथ भारत के पड़ोसी देशों में जो ‘बिग ब्रदर्स सिंड्रोम’ की छवि बनी हुई है, उसे भी निष्प्रभावी करने की ओर बढ़ना चाहिए। अगर भारत को हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के मार्शल प्लान को रोकना है तो उसे पड़ोसी देशों के साथ शांति पूर्ण संबंधों की बहाली पर युद्धस्तर पर कार्य करना होगा ।
’शेषमणि शर्मा, इलाहाबाद विवि, प्रयागराज

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: युद्ध और शांति
2 चौपालः ऊहापोह के बीच
3 चौपालः अपने-पराए का भेद
ये पढ़ा क्या?
X