ताज़ा खबर
 

चौपालः हाशिये पर बचपन

[jwplayer hCh13eP7-gkfBj45V]

Author June 14, 2018 5:22 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

लगभग बीस वर्ष पहले बाल मजदूरी के खिलाफ दुनिया भर में एक ‘ग्लोबल रैली’ निकाली गई थी। उस रैली ने एक सौ तीन देशों से गुजरते हुए करीब अस्सी हजार किलोमीटर लंबी दूरी तय की थी और जेनेवा में स्थित संयुक्त राष्ट्र भवन में पूरी हुई थी। लेकिन आज भी जब हम घर से बाहर निकलते है तो हमें चौक-चौराहों पर कई ऐसे बच्चे दिखाई देते हैं, जो हाथों में कपड़ा लिए होते हैं और जिनकी उम्र स्कूल में पढ़ने की होती है। लेकिन वे गाड़ियों को साफ करने के बदले कुछ पैसों की उम्मीद कर रहे होते है। वहीं पास में कोई बच्चा भीख मांग रहा होता है तो कोई किसी होटल, ढाबे में या कूड़ेदान में फेंके गए कचरे में से कुछ चुन रहा होता है।

लेकिन उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं देना चाहता। जब से लोगों में थोड़ी जागरूकता बढ़ी है और बाल श्रम कानून बना है, तब से बाल श्रम में थोड़ी कमी आई है। लेकिन अभी भी कानून होने के बावजूद विश्व में कई करोड़ बच्चे बाल श्रम की चपेट में है। इस समस्या का समाधान तब तक नहीं होगा, जब तक सभी लोग और हमारा सरकारी तंत्र इस ओर ध्यान नहीं देगा। अगर हम बात करें भारत की, तो आज भी यहां मानव तस्करी के तहत बच्चों को गायब करने का धंधा तेजी से फैल रहा है और उनसे बाल श्रम करवाया जा रहा है। बच्चों के श्रम का लाभ उठाने वाले सबसे ज्यादा आरोपी पढ़े-लिखे घरों से होते हैं। कुछ महीने पहले हरिद्वार से एक खबर आई थी, जिसके मुताबिक एक बच्ची से काम करवाया जाता था और उसे मारा भी जाता था। इस मामले में मुख्य आरोपी महिला जज के पद पर काम करने वाली थी। अगर कानून का पालन सुनिश्चित कराने वाले ऐसा कर सकते हैं तो दूसरों से हम क्या उम्मीद करें!

सवाल है कि प्रशासन और पुलिस कहां है। आज हम सबको एक साथ बाल श्रम के विरुद्ध आवाज उठानी होगी और इसके शिकार बच्चों को उनका हक दिलाना होगा। उन्हें मजदूरी की जगहों के बजाय स्कूल भेजे जाने की व्यवस्था करवानी होगी। बाल श्रम कराने वाले लोगों को कड़ी सजा मिल सके, इसकी व्यवस्था पर जोर देना होगा। अफसोस की बात यह है कि सरकार कानून तो बना देती है, लेकिन उस पर अमल को लेकर आमतौर पर लापरवाह होती है। समाज और विश्व को इस समस्या के प्रति जागरूक होना होगा। तभी हमारे देश के नौनिहालों को अपना जीवन जीने का हक मिल सकेगा।

आशीष, रामलाल आनंद कॉलेज, डीयू

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App