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चौपालः स्त्री के हक में

अफसोस की बात तो यह है कि कई बार इस प्रकार के प्रकरणों में पुरुषवादी मानसिकता वाले लोग इसे अपने जीवन का निजी मामला बता कर खुद को बेहतर बताने का प्रयास करते हैं।

कंक्रीट का एक-एक निवास- उसे घर बनाने में एक महिला की सबसे बड़ी भूमिका होती है।

कंक्रीट का एक-एक निवास- उसे घर बनाने में एक महिला की सबसे बड़ी भूमिका होती है। लेकिन जब उसी घर में उस महिला पर अमानवीय तरीके से हिंसा की जाए तो यह निश्चित रूप से अफसोसनाक है। महिलाएं अतीत से वर्तमान तक अलग-अलग तरह की हिंसा का शिकार रही हैं। घरेलू हिंसा और भी डरा देने वाली है, क्योंकि यह सामान्यता तात्कालिक रूप से समाज में नजर नहीं आती और भरोसे के पर्दे में घर की चारदिवारी के भीतर होती है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक खबर आई कि एक आला दर्जे का पुलिस अफसर अपनी पत्नी को बेरहमी से पीट रहा था और उसका वीडियो वायरल हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि हम आज भी महिलाओं की सुरक्षा के मामले में कितने पिछड़े हुए हैं। जब हम बार-बार अपनी नीतियों में यह उल्लेख करते हैं कि शिक्षा से महिला हिंसा, विशेषकर घरेलू हिंसा को कम कर सकते हैं तो यह हास्यप्रद लगता है। एक लोक सेवक, जिसमें संभवत शिक्षा की कोई कमी नहीं है, लेकिन वह भी क्रूरता से महिला पर शारीरिक हिंसा करने से नहीं हिचकता है।

एक घटना किसी तरह सामने आ जाती है, लेकिन ऐसी न जाने कितनी घटनाएं दबी रह जाती हैं। हमारे देश में पता नहीं कितनी महिलाएं हैं जो घरेलू हिंसा का शिकार होती रहती हैं और सहती हैं। हमें उनकी भनक तक नहीं लग पाती है। जागरूकता और शिकायत के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी दयनीय है। घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 इस उम्मीद से लाया गया था कि यह कानून अपनी मूल यात्रा में सफल होगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि सरकारें भी कानून को बनाने के बाद उनके लागू करवाने पर उचित ध्यान नहीं देती हैं। यही कारण है कि स्थिति में कोई संतोषजनक सुधार नहीं हुआ।

अफसोस की बात तो यह है कि कई बार इस प्रकार के प्रकरणों में पुरुषवादी मानसिकता वाले लोग इसे अपने जीवन का निजी मामला बता कर खुद को बेहतर बताने का प्रयास करते हैं। केवल संसद में महिलाओं का प्रतिशत बढ़ा देने से, पंचायती राज्यों में महिलाओं को आरक्षण दे देने से, सरकारी नौकरियों में सुरक्षा देने से और केवल कागजों के आंकड़ों मात्र से महिला की बेहतरी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह जमीनी स्तर पर कानूनों को लागू करवाए। सरकार इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए यह उपाय कर सकती है कि वह महिलाओं से संबंधित सभी कानूनों की जानकारी का विस्तार करने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं। दूसरे, बड़े पैमाने पर महिला पुलिस थाने खोले जाएं और महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाए। तीसरा और अहम उपाय यह हो सकता है कि महिलाओं के लिए बने सभी कानूनों को स्कूली शिक्षा में शामिल किया जाए।
’सौरव बुंदेला, भोपाल, मप्र

 

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