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चौपाल:चौपाल: विपरीत वक्‍त

इस तरह से लगातार चुनाव हारने के पश्चात कांग्रेस इस बात की समीक्षा नहीं कर रही कि उसके कमजोर होते जाने के पीछे क्या वजह है। बदलते समय के अनुसार अपने विधायक तथा संसद सदस्य और पुराने समय में कांग्रेस में जुड़े हुए अनेक नेता इस दुर्गति को देखते हुए कांग्रेस से अलविदा हो चुके हैं। कांग्रेस को अपनी विचारधारा तथा विभिन्न प्रकार के कार्य करने पर जमीन से जुड़े नेताओं की कद्र करनी होगी।

जनसभा को संबोधित करते राहुल गांधी। फाइल फोटो।

भारत की आजादी के पश्चात कांग्रेस ने लंबे समय से केंद्र और राज्यों में शासन किया बदलते हुए समय के अनुसार अब कांग्रेस की हालत ऐसी हो गई है कि उसको विपक्षी दर्जे के दौरान औपचारिकता भी पूरी नहीं हो पाती और उसके अनुसार उसकी सीटें भी नहीं आ रहीं। एक समय ऐसा था कि केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार होती थी और लंबे समय तक चली भी। बदलते समय के अनुसार अब विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव होते हैं, लेकिन कांग्रेस का अनेक जगह पर तो हालत ऐसी है कि उसका खाता भी नहीं खुल पाता। लोकसभा चुनाव में तो उसकी हालत इतनी खस्ता है कि वह बड़े राज्यों में लंबा शासन करने के बाद भी उसके सदस्य ही बड़ी मुश्किल से जीत पाते हैं। बल्कि इस बार के चुनाव में तो अपनी सीट गंवा कर कांग्रेस एक सीट जीत कर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपनी इज्जत ही बचा पाई।

इस तरह से लगातार चुनाव हारने के पश्चात कांग्रेस इस बात की समीक्षा नहीं कर रही कि उसके कमजोर होते जाने के पीछे क्या वजह है। बदलते समय के अनुसार अपने विधायक तथा संसद सदस्य और पुराने समय में कांग्रेस में जुड़े हुए अनेक नेता इस दुर्गति को देखते हुए कांग्रेस से अलविदा हो चुके हैं। कांग्रेस को अपनी विचारधारा तथा विभिन्न प्रकार के कार्य करने पर जमीन से जुड़े नेताओं की कद्र करनी होगी। मौजूदा कांग्रेस की यही हालत रही तो आने वाले समय में विभिन्न राज्यों के हो रहे विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की स्थिति और खराब हो जाएगी।
’विजय कुमार धनिया, नई दिल्ली

नया अध्याय

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के अब तक के राजनीतिक सफर पर गौर किया जाए तो उन्होंने भारत के साथ अमेरिका के मजबूत संबंधों की पहल की है। सीनेटर और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल में उन्होंने कई ऐसे विधेयकों का समर्थन किया था, जो भारत को लाभ पहुंचाने वाले थे। उनके अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से आप्रवासी भारतीयों को नागरिकता मिलने की संभावना है। ग्रीन कार्ड वीजा की सीमा बढ़ाई जा सकती है, जिससे भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आतंकवाद को प्रोत्साहित करने वाले देशों की आर्थिक मदद रोकी जा सकती है। बाइडेन के राष्ट्रपति बनने से डिफेंस के क्षेत्र में भारत और अमेरिका की साझेदारी बढ़ने की भी प्रबल संभावना है।
’ललित महालकरी, इंदौर, मप्र

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