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चौपाल: पर्यावरण से हम

उत्तर भारत में आसमानी बिजली से कई लोग मारे गए वहीं बंगाल समेत दक्षिण के लोग कई शक्तिशाली तूफान से सहम गए। बंगाल में चक्रवात ने जो कहर बरपाया, उसे इससे समझा जा सकता है कि उसकी तुलना प्रलय से की गई।

सांकेतिक फोटो।

आज दुनिया के सामने कई गंभीर मुद्दे हैं। इन सब के बीच हमारा पर्यावरण भी हमसे कुछ कहना चाह रहा है, जिसे हम हमेशा से नजरअंदाज करते आए हैं और आज भी उसी गलती को दोहरा रहे हैं। कॉर्बन उत्सर्जन, वायु प्रदूषण और नदियों के सिकुड़ते अस्तित्व से हम मनुष्यों का अस्तित्व भी खतरे में है। सन 2020 में हमने कुदरत के खतरनाक रूप को देखा। उत्तर भारत में आसमानी बिजली से कई लोग मारे गए वहीं बंगाल समेत दक्षिण के लोग कई शक्तिशाली तूफान से सहम गए।

बंगाल में चक्रवात ने जो कहर बरपाया, उसे इससे समझा जा सकता है कि उसकी तुलना प्रलय से की गई। प्रकृति की रक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में हमें सजग होना होगा और प्रकृति के लिए समय देना होगा। पिछले वर्ष पूरे विश्व ने जिस तरह की प्राकृतिक आपदाओं को झेला है, वह अब हमारे लिए खतरे का सबब बन रहा है। बाकी मसलों से कुछ समय बचा कर हमें कभी पर्यावरण के शोषण पर भी विचार करना चाहिए और उसे बचाने के लिए मजबूत कदम उठाने चाहिए।
’मयंक मिश्रा, मधुबनी, बिहार

बेमानी वार्ता
दोहा के कतर में पिछले कई महीनों से तालिबान, अफगानिस्तान सरकार और अमेरिका के बीच शांति वार्ता चल रही है। इस बीच अफगानिस्तान स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैंं। जहां 2019 में 2813 लोग गृह युद्ध का शिकार हुए थे, वहीं शांति वार्ता के दौरान 2020 में कुल 2958 नागरिकों की जान गई। यानी प्रतिदिन आठ लोग जुल्म, हिंसा और अराजकता का शिकार हुए।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या अफगानिस्तान के हिस्से में केवल हिंसा और आगजनी ही लिखी हुई है? क्या वहां के नागरिकों को शांति से रहने एवं जीवनयापन करने का कोई अधिकार नहीं है? तालिबान के साथ शांति वार्ता का मतलब है कि आदमखोर शेर के पिंजड़े में इंसान को धकेल देना। अमेरिका अपनी जिम्मेदारियों से भागते हुए ऐसी प्रलयंकारी वार्तालाप में अफगानिस्तान के लोगों को फंसा गया है। देखें राष्ट्रपति बाइडेन उस नीति को पलटते हैं या नहीं!
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर, झारखंड

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