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आतंक की दस्तक

जनसत्ता 17 अक्तूबर, 2014: खबर है कि विश्वभर के देशों के लिए दरिंदगी का पर्याय बन चुके आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट आॅफ इराक एंड सीरिया (आइएसआइएस) ने हमारे देश में दस्तक देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह बात पिछले दिनों कश्मीर की उस घटना से प्रमाणित होती है जिसके अनुसार श्रीनगर के लालचौक में […]

जनसत्ता 17 अक्तूबर, 2014: खबर है कि विश्वभर के देशों के लिए दरिंदगी का पर्याय बन चुके आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट आॅफ इराक एंड सीरिया (आइएसआइएस) ने हमारे देश में दस्तक देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह बात पिछले दिनों कश्मीर की उस घटना से प्रमाणित होती है जिसके अनुसार श्रीनगर के लालचौक में पिछले दिनों जुम्मे की नमाज के बाद युवकों के एक हुजूम ने आइएसआइएस के (काले) झंडों को नारे लगाते हुए सरेआम फहराया था। सुरक्षाकर्मियों से इस हुजूम की मुठभेड़ भी हुई थी। जहां एक तरफ कश्मीर के रास्ते हमारे देश में आइएसआइएस के प्रवेश की बढ़ती संभावनाओं को लेकर देश के शांतिप्रिय नागरिकों की चिंता का बढ़ना स्वाभाविक है, वहीं दूसरी तरफ ताज्जुब यह है कि जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह कह कर सवाल/ मामले की गंभीरता को हलके में ले लिया कि यह चंद-एक मूर्ख या सिरफिरे युवकों का काम है। उनके इस तरह से झंडे फहराने का मतलब यह नहीं है कि कश्मीर में आइएसआइएस का कोई प्रभाव है या वह इस प्रदेश में अपने पैर जमा रहा है।

अब्दुल्ला के वक्तव्य को लेकर इस अति संवेदनशील मुद्दे पर कई टीवी चैनलों पर बहस हुई। प्राय: हर राजनीतिक पार्टी के प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री के बयान को गैरजिम्मेदाराना और अनुचित बताया। सभी का मानना था कि इस तरह की घटना को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि यह राष्ट्रीय अस्मिता और देश-प्रदेश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है। मुख्यमंत्री को तुरंत इस तरह की गतिविधियों को रोकने अथवा इनके बारे में पता लगाने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए थे और इसकी जानकारी मीडिया और केंद्र को दे देनी चाहिए थी। बहसों के दौरान यह बात भी सामने आई कि कश्मीर में जल्दी ही चुनाव होने वाले हैं, इसलिए संभवत: वहां की सरकार अलगाववादियों के विरुद्ध कोई बड़ा कदम उठाने में हिचक रही है। यानी दूसरे शब्दों में आतंककारी/ पृथकतावादी तत्त्वों को प्रदेश सरकार मूक समर्थन दे रही है!

मामला गंभीर है। आइएसआइएस कोई मामूली आतंकी संगठन नहीं है। एक सूचना के अनुसार यह दुनिया का सबसे अमीर और खूंखार आतंकी संगठन है जिसका बजट दो अरब डॉलर का है। यह संगठन जॉर्डन, फिलस्तीन, लेबनान, कुवैत, साइप्रस और दक्षिणी तुर्की में अपना वर्चस्व जमाए हुए है। लिहाजा, इस संगठन की भारत में दस्तक को नकारना हम सबको भारी पड़ सकता है।

सत्तालोलुप राजनेता तो जेड श्रेणी की सुरक्षा लेकर किनारे बैठे जाएंगे मगर खमियाजा तो आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा। रेत में सर डाल कर हकीकत की अनदेखी करने के क्या खतरनाक परिणाम हो सकते हैं, यह सारा विश्व देख रहा है। पश्चिमी देशों ने अगर समय रहते आइएसआइएस के मंसूबों को भांप लिया होता और कठोर कारवाई की होती तो आज स्थिति दूसरी होती।

 

शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

 

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