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कथनी बनाम करनी

जनसत्ता 14 अक्तूबर, 2014: मोदी कहते हैं कि नानाजी देशमुख चुनाव लड़ने के लिए पंद्रह सौ रुपए देते थे। यदि मुद्रास्फीति को भी हिसाब में ले लिया जाए तो अब यह राशि डेढ़ लाख से अधिक नहीं होगी। आज इतना खर्चा तो मोदी एक बार हेलीकाप्टर में बैठकर कर देते हैं। मोदी बार-बार अपने को […]

जनसत्ता 14 अक्तूबर, 2014: मोदी कहते हैं कि नानाजी देशमुख चुनाव लड़ने के लिए पंद्रह सौ रुपए देते थे। यदि मुद्रास्फीति को भी हिसाब में ले लिया जाए तो अब यह राशि डेढ़ लाख से अधिक नहीं होगी। आज इतना खर्चा तो मोदी एक बार हेलीकाप्टर में बैठकर कर देते हैं। मोदी बार-बार अपने को चायवाला कह कर मतदाताओं को भावमात्मक रूप से लुभाने की कोशिश करते हैं। काश, सभी चायवाले मोदी जैसे ठाठ-बाट से रहें जोचायवाले तो क्या, चाय बागानों के मालिकों को भी मात दे दे।

नानाजी ने साठ साल के बाद राजनीति से संन्यास की कही थी तो कम से कम भाजपा के लोग ही इसका अनुशरण साठ साल में नहीं तो सत्तर साल की उम्र में राजनीति से संन्यास लेकर अन्य दलों को भी प्रेरित करें।

यश वीर आर्य, दिल्ली

 

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