ताज़ा खबर
 

ठगी की चाल

हमारे देश में कई तथाकथित अपने नाम के आगे संत, धर्माचार्य, स्वामी आदि लगा कर विशिष्टता प्राप्त करते रहे हैं। समय आ गया है कि स्थापित धार्मिक संस्थाएं इस संबंध में कोई ठोस निर्णय लें। प्रजातंत्र हमें हाथ घुमाने की आजादी देता है, लेकिन यह खयाल हमें रखना होगा कि हमारा हाथ देश के कानून […]

हमारे देश में कई तथाकथित अपने नाम के आगे संत, धर्माचार्य, स्वामी आदि लगा कर विशिष्टता प्राप्त करते रहे हैं। समय आ गया है कि स्थापित धार्मिक संस्थाएं इस संबंध में कोई ठोस निर्णय लें।

प्रजातंत्र हमें हाथ घुमाने की आजादी देता है, लेकिन यह खयाल हमें रखना होगा कि हमारा हाथ देश के कानून की सीमाओं में रहे और किसी दूसरे की नाक को न छुए। देश में बहुत से लोग आज भी ठग बाबाओं के मकड़जाल में फंसे हुए हैं।

समझ में नहीं आता कि हमारे वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी इस स्थिति को बदलने के लिए ठोस प्रयास क्यों नहीं करते? यह जिम्मेदारी मीडिया की भी है कि वे भी लोगों को सही-गलत में भेद करना सिखाएं। साथ ही हम ऐसे नेताओं को कतई अपना वोट न दें, जो चुनाव जीतने के लिए तथाकथित बाबाओं से आशीर्वाद लेते हैं।

राजनीतिक दलों को भी हर समय हर मुद्दे पर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश में नहीं रहना चाहिए। खेद की बात यह है कि हमारे सारे राजनीतिक दल इस मामले में एक जैसे हैं।

 

सुभाष लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

 

Next Stories
1 भ्रम के साए
2 आस्था के सरोकार
3 इतना महिमामंडन
ये पढ़ा क्या?
X