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साफ सफाई

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवन में स्वच्छता के पक्षधर थे। उनका कहना था, ‘स्वच्छता आजादी से महत्त्वपूर्ण है।’ बापू के इस कथन से स्वच्छता के महत्त्व को समझा जा सकता है। बहरहाल, हम सभी इस तथ्य से परिचित हैं कि अस्वच्छ परिवेश कई रोगों के फैलाव का आधार बनता है। स्वच्छता का जन-कल्याण के साथ गहरा […]

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवन में स्वच्छता के पक्षधर थे। उनका कहना था, ‘स्वच्छता आजादी से महत्त्वपूर्ण है।’ बापू के इस कथन से स्वच्छता के महत्त्व को समझा जा सकता है। बहरहाल, हम सभी इस तथ्य से परिचित हैं कि अस्वच्छ परिवेश कई रोगों के फैलाव का आधार बनता है। स्वच्छता का जन-कल्याण के साथ गहरा संबंध है। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन का पूरी तरह आनंद लेना चाहता है। जीवन का आनंद तभी लिया जा सकता है, जब व्यक्ति विशेष का स्वास्थ्य अच्छा हो। अच्छा स्वास्थ्य कुछ अन्य बातों के अलावा हमारी व्यक्तिगत और पर्यावरण की स्वच्छता पर भी निर्भर करता है।

व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए व्यक्ति को स्वयं ही प्रयत्नशील होना पड़ता है। स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वच्छता का विशेष महत्त्व है। स्वच्छता अपनाने से व्यक्ति रोग मुक्त रहता है और राष्ट्र-निर्माण में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में स्वच्छता अपनानी चाहिए और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। हम अपने समाज और राष्ट्र के प्रति कितने जागरूक हैं, इस सवाल का जवाब हमें बोल कर नहीं, अपने द्वारा किए जाने वाले कार्यों से देने चाहिए। सार्वजनिक स्थानों में गंदगी फैलाने वाले लोग समाज और देश को नुकसान पहुंचाते हैं।

यह जरूरी है कि हम अपने पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहें। अक्सर जाने-अनजाने गंदगी फैलाने में हम निरंतर योगदान देते रहते हैं। दरअसल, स्वच्छता को बनाए रखने के लिए सामुदायिक स्तर पर हम सभी को एक रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। सवा अरब की आबादी वाले देश में स्वच्छता का काम सिर्फ कुछ सरकारी कर्मियों के भरोसे पूरा होना नामुमकिन है। अपने आसपास के सभी स्थानों को साफ -सुथरा रखने में हम सभी को सहयोग देना होगा।

ऐसे सभी देश जहां आपको स्वच्छता नजर आती है, वहां प्रत्येक नागरिक इस कार्य में सरकार को सहयोग देता है। मुझे अभी पिछले पांच-छह महीनों के दौरान अमेरिका के विभिन्न भागों में भ्रमण का मौका मिला। मैंने वहां किसी को भी सड़क पर थूकते, नाक साफ करते, केले या मूंगफली के छिलके फेंकते नहीं देखा है। वहां रहने वाले भारतीय भी ऐसा नहीं करते। वहां कोई केले के छिलके पर कभी नहीं फिसल सकता, क्योंकि वहां सड़क पर छिलका होता ही नहीं। लोगों को स्वच्छता के महत्त्व पर जानकारी देने के लिए मीडिया का भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए। दरअसल, स्वच्छता जीवन की बुनियादी जरूरत है और इसके लिए हमें विभिन्न स्तरों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे।

 

सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

 

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